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मंदसौर किसान आंदोलन: 19 साल बाद दोहराया गया मुलताई का इतिहास!

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मंदसौर…..मध्यप्रदेश का वह जिला जहाँ किसानों द्वारा किये गए आंदोलन ने एक ऐसा भयावह रूप ले लिए हैं जिसे अब तक प्रशासन द्वारा संभाल पाना मुश्किल हो रहा है. परंतु क्या आप जानते हैं कि इसी राज्य में ऐसा ही एक आंदोलन 19 साल पहले भी हुआ था जिसमे किसानों और सेना के बीच झड़प में 24 किसान बेमौत मारे गए थे. उस समय मध्यप्रदेश में कांग्रेस की सरकार का राज था और मुख्यमंत्री थे दिग्विजय सिंह.

मुलताई-मंदसौर किसान आंदोलन की कहानी में हैं समानताएं : 

  • मध्यप्रदेश के मंदसौर में होने वाला यह किसान आंदोलन पहला ऐसा नहीं है जिसने भयावह रूप लिया हो.
  • इससे पहले 12 जनवरी, 1998 भी यहाँ के मुलताई किसान आंदोलन में ऐसा देखने को मिला था.
  • बता दें दोनों घटनाओं में काफी समानताएं हैं जिस कारण इसे मुलताई के किसान आंदोलन से जोड़ा जा रहा है.

पहली समानता-

  • इन दोनों ही घटनाओं में किसान आंदोलन कर रहे थे साथ ही एक ही दोनों में एक ही तरह की मांग थी.
  • बता दें कि मुलताई और मंदसौर में किसानों की मांग ऋण मुक्ति और मुआवजा दिया जाना था.
  • उस समय भी किसानों को फसल में हुए नुक्सान के चलते मांग को उठाया गया था.
  • वैसा ही कुछ इस आंदोलन में भी देखने को मिला है,
  • जिसमे सरकार से फसल के नुक्सान हेतु मुआवज़े की माग की गयी.

दूसरी समानता-

  • दूसरी समानता में इन दोनों घटनाओं में यह आंदोलन हिंसात्मक बन गया और इसमें जानों को नुक्सान हुआ था.
  • मुलताई आंदोलन में किसानों ने सरकार को उनकी मांगें पूरी करने की चेतावनी दी थी.
  • साथ ही अचानक ही वे अपनी मांगे मनवाने के लिए हथियार लेकर एक तहसील हो घेर किया था.
  • यही नही इन किसानों द्वारा इस तहसील को ताला लगा दिया गया था और सरकारी कर्मचारियों पर पथराव किया गया था.
  • इसके अलावा उनकी दो गाड़ियों को आग के हवाले कर दिया था और सरकारी वस्तुओं को नुक्सान पहुँचाया था.
  • ऐसा ही कुछ मंदसौर घटनाक्रम में भी देखने को मिला है जिसमे किसानों का यह आंदोलन भयानक हो गया.
  • साथ ही किसानों द्वारा यहाँ मौजूद रेलवे ट्रैकों को उखाड़ा जाने लगा और फाटकों को तोड़ा गया.
  • यही नहीं इस दौरान उन्होंने सेना बल पर पथराव भी किया है और करीब 27 गाड़ियों को आग भी लगायी है.

तीसरी समानता-

  • दोनों ही घटनाक्रमों में तीसरी समानता यह रही कि इस दौरान झड़प में गोलियां चली.
  • इन गोलियों के चलने के कारण किसानों की मौत हो गयी थी.
  • बता दें कि मुलताई में गोलियां चलने के कारण लगभग 24 किसानों की मौत हो गयी थी.
  • किसानों द्वारा हिंसा किये जाने के बाद सरकार द्वारा ओपन फायर करने के आदेश जारी कर दिए गए थे.
  • वहीँ मंदसौर में किसानों और सेना के बीच झड़प में पांच किसानों की मौत हो गयी है.
  • हालाँकि अभी तक इस घटनाक्रम में या साफ़ नहीं हो सका है कि गोलियां कैसे और किसके द्वारा चलायी गयी.

चौथी समानता-

  • मंदसौर और मुलताई में हुए किसान आंदोलन में एक और समानता है जो बेहद चौका देने वाली है.
  • दरअसल यह दोनों ही जिले मध्यप्रदेश के हैं और यही नहीं इन जिलों के नाम ‘म’ अक्षर से शुरू होते हैं.
  • यह एक ऐसी समानता है जो जो काफी चौका देने वाली है जिसके बाद हम यह कह सकते हैं कि इतिहास दोबारा दोहराया गया है.

यह भी पढ़ें : मंदसौर कलह : नीमच पहुँचते ही हिरासत में लिए गए राहुल गाँधी!

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