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व्यंग्य

कविता: जहर गहरी पैठ ?

poetry represents kashmir politics between mehbooba and abdullah

अब्दुल्ला-महबूबा ।
पंचायत का विरोध ।।

दशकों का कुशासन ।
विषय बना शोध ।।

ये दो परिवार ।
सुलगाये प्रदेश ।।

कुढ़ता रहा देश ।
क़ायम है क्लेश ।।

भटके नौजवान ।
छवि है गुमराह ।।

जहर गहरी पैठ ।
आवाम है गवाह ।।

कृष्णेन्द्र राय

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