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व्यंग्य

व्यंग: साख पर अब बट्टा !

साख पर अब बट्टा  ।

खुद पर छापेमारी  ।।

लग गया प्रश्न-चिन्ह ।
द्वंद की ख़ुमारी ?

हेडक्वार्टर अखाड़ा ।
हो गया सार्वजनिक ।।

उच्च पदों का चक्कर ।
लाज ना तनिक ।।

स्थितियाँ विकट ।
ना रहा कुछ शेष ।।

मीठे-मीठे बोल ।
अन्ततः अब ठेस ।।

कृष्णेन्द्र राय

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Reporter : Krishnendra Rai

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