Home » व्यंग: नैतिकता लाचार!
व्यंग्य

व्यंग: नैतिकता लाचार!

Literature special satire on no moral in politics

टूट रहे विधायक ।
जुट रही सरकार ।।

जनसेवा हावी ।
नैतिकता लाचार ।।

राजनीतिक अखाड़ा ।
पटखनी पर ज़ोर ।।

हो जाना क़ाबिज़ ।
ना मचाओ शोर ।।

करनी है लीला ।
निहार रही जनता ।।

उठापटक विरासत ।
अभिनय करे समता ?

कृष्णेन्द्र राय

UTTAR PRADESH NEWS की अन्य न्यूज पढऩे के लिए Facebook और Twitter पर फॉलो करें

Reporter : Krishnendra Rai

Related posts

व्यंग: तुष्टीकरण की हद !

Krishnendra Rai

व्यंग: ना छोड़ो ईरान !

Krishnendra Rai

व्यंग्य : माँ गंगा ने बुलाया…

Desk