व्यंग्य

हादसा ये अमृतसर !

त्राहिमाम-त्राहिमाम ।
सस्ती हुई जान ।।

घोर लापरवाही ।
हर लिए प्राण ।।

असह्य अब पीड़ा ।
हादसा ये अमृतसर ।।

जो भी ज़िम्मेदार ।
बरपाओ क़हर ।।

तड़प रहे कुटुंब ।
ग़मज़दा है देश ।।

ना सेंको रोटी ।
क्या रहा अब शेष ।।

कृष्णेन्द्र राय

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Reporter : Krishnendra Rai

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