व्यंग्य

कविता: ऐ छप्पन इंच !

literature special poetry on show real power for justice

एक के बदले दस ।
जोश पड़ा ठंडा ?

ऐ छप्पन इंच ।
कब उठेगा डंडा ?

काँप रही रूह ।
ग़ुस्से में आवाम ।।

कड़ी निंदा बेअसर ।
दिखाओ तुम अंजाम ।।

लव-लेटर फाड़ दो ।
रूखसत विदेश नीति  ।।

ना करो असहाय ।
नहीं हिंद की रीति ।।

कृष्णेन्द्र राय

Reporter : Krishnendra Rai

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