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व्यंग्य

पनपाओ भाईचारा !

Literature special poetry on companionship in politics

पनपाओ भाई-चारा ।
ना तुम भड़काओ ।।

सड़ी-गली मानसिकता ।
घर रख कर आओ ।।

माफ़ ना करेगा ।
तुमको ये मुल्क ।।

गवाह है इतिहास ।
भारी होगा शुल्क ।।

ओछी राजनीति ।
सड़क छाप नेता ।।

तोड़ो तुम लाख ।
पर हम विजेता ।।

कृष्णेन्द्र राय

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Reporter : Krishnendra Rai

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