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व्यंग्य

व्यंग : ‘ललकारते नक्सली’

‘ललकारते नक्सली’
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ललकारते नक्सली ।
हिम्मत बढ़ती जाये ।।
कब होगा सफ़ाया ?
हम ना जान पाये ।।
बढ़ता उनका हौसला ।
कार्रवाई का बदला ?
इनपुट नज़रअंदाज़ ।
प्लान कुछ अगला ?
सस्ती हुई जान ।
हत्याएँ जारी ।।
करो बंदोबस्त ।
अब कैसी लाचारी ?

कृष्णेन्द्र राय

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Reporter : Uttar Pradesh

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