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चिड़ियाघर में सफेद बाघिन के शावक खाते हैं प्लास्टिक की बोरी, मचा हड़कंप!

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राजधानी के हजरतगंज इलाके में स्थित वाज़िद अली शाह प्राणी उद्यान (चिड़ियाघर) में बड़ी लापरवाही प्रकाश में आई है।

  • यहां सफेद टाइगर बाड़े में शावक सीमेंट की बोरी खाते दिखे।
  • जब हमारे छायाकार ने अपने कैमरे में तस्वीर कैद की तो चिड़ियाघर प्रशासन में हड़कंप मच गया।
  • इस संबंध में चिड़ियाघर के निदेशक अनुपम गुप्ता ने uttarpradesh.org से बातचीत के दौरान बताया कि बाड़े में पानी पीने के लिए भरा जा रहा था।
  • इस दौरान पाईप की टोंटी में बोरी लगाई गई थी तभी एक शावक ने झपट्टा मारकर बोरी को मुंह में दबा लिया था।
  • मौके पर मौजूद कीपर ने फौरन बोरी छीन ली थी इसमें कोई नुकसान की बात नहीं है।

धोखे से बोरी पहुंची बाघ के मुंह

  • बता दें कि शावक द्वारा प्लास्टिक की बोरी खाने का यह मामला बुधवार दोपहर का है।
  • इस दृश्य ने चिड़ियाघर प्रशासन की लापरवाही को उजागर कर दिया है।
  • प्लास्टिक खाने का यह कोई पहला मामला नहीं है बल्कि इससे पहले भी शेर के शावक प्लास्टिक की बोतल खाते समय कैमरे में कैद हुए थे, तब भी हड़कंप मचा था।
  • गौरतलब है कि पिछले साल 26 अगस्त 2016 को 15 साल के बाद बाघिन विशाखा ने तीन शावकों को जन्म दिया था।
  • इनमें से कमजोरी की वजह से एक की मौत हो गई थी जबकि दो बच्चे अब बड़े हो गए हैं।
  • ज़ू के निदेशक अनुपम गुप्ता ने बताया कि चिड़ियाघर प्रशासन शावकों को कैल्शियम के अलावा मिनिरल्स भी दे रहा है।
  • इसके अलावा उन्हें मांस भी दिया जा रहा है।
  • उन्होंने बताया कि इस बाघिन विशाखा को छत्तीसगढ़ के भिलाई ज़ू से लाया गया था।
  • उन्होंने बताया कि प्लास्टिक खाने का मामला धोखे से हुआ है जानबूझ कर कोई ऐसा नहीं कर सकता।

निदेशक से कर्मचारियों ने बोला झूठ

  • चिड़ियाघर के निदेशक ने जो मीडिया को बयान दिया है वह असलियत से अलग है।
  • इसका मतलब यह कि निदेशक से कर्मचारियों ने झूठ बोला है।
  • क्योकि निदेशक ने पानी की टोटीं में प्लास्टिक की बोरी लगाने की बात कही लेकिन जो बोरी बाघ मुंह में दबाये है वह एक दम सूखी है।
  • प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार बाघ ने पास के बाड़े की सीमेंट की बोरी मुंह में दबाई थी।
  • यह बोरी यहां काम कर रहे कर्मचारियों की लापरवाही से छूटी थी।
  • सूत्रों का कहना है कि बाघों को पीने का पानी तक नहीं मिलता है वह प्यासे घूमते रहते हैं।
  • हालांकि इस मामले में जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
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