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सीतापुर: क्या खैराबाद में लकड़बग्घों और सियारों ने बच्चों को नोचा…?

By: Sudhir Kumar

Published on: Sun 06 May 2018 11:34 AM

Uttar Pradesh News Portal : सीतापुर: क्या खैराबाद में लकड़बग्घों और सियारों ने बच्चों को नोचा…?

बीते कुछ दिनों में सीतापुर में खूंखार कुत्तों के हमले में 12 जान गवाने वाले मामले में चौंकाने वाले तथ्य सामने आए। लखनऊ से पहुंची एक टीम के सदस्यों ने शुरुआती जांच में यह पाया कि सीतापुर के खैराबाद में तांडव मचाने वाले कुत्ते नहीं बल्कि दूसरे जंगली हिंसक वन्यजीवों (सियार या लकड़बग्घे) के दल की मौजूदगी की संभावना है। जो समूह में ही इलाके में सक्रिय हैं और भटके एकांत में घूमने वाले बच्चों पर ही अटैक कर रहा हैं।

एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के पूर्व को-ऑप्टेड मेंबर रहे पशु प्रेमी राजधानी के विवेक शर्मा ने बताया कि लखनऊ से गई रेबीज यूनिट की टीम के सदस्यों ने पड़ताल में कुछ नए तत्व पाए हैं। जो कि इशारा कर रहे हैं कि वहां कुत्तों के अलावा अन्य हिंसक वन्यजीवों का भी बसेरा हो सकता है जो वारदात कर रहे हैं। इसके लिए टीम को पीड़ितों से पूछताछ, पड़ताल में पाया कि पीड़ितों घायल वयस्कों पर हमला करने वाले कुत्ते नहीं थे। बल्कि उनकी बताई शारीरिक बनावट सियार और लकड़बग्घे से मेल खा रही थी। ऐसे में प्रशासन को पोस्टमार्टम कराने के अलावा वन विभाग की वाइल्डलाइफ भिन्न को भी शुमार करना चाहिए ताकि कम से कम सही स्थिति का आकलन हो सके। पशु प्रेमियों ने कुछ अन्य बिंदुओं से भी कुत्तों के ही पूरे मामले में शामिल होने पर एतराज जताया।

12 कुत्तों को आखिर किसने नोचकर मारडाला

सीतापुर जिला के खैराबाद इलाके में आदमखोर कुत्तों का आतंक इस कदर है कि नवंबर 2017 से 5 मई 2018 तक आदमखोर कुत्ते 12 बच्चों को अपना निवाला बना चुके हैं। इन बच्चों में मात्र 6 के ही पोस्टमार्टम कराए गए हैं। कुत्तों से निपटने वाली टीम में शामिल खैराबाद थाना अध्यक्ष सचिन सिंह ने बताया कि 6 परिवार के सदस्यों ने अपने बच्चों के शवों को पोस्टमार्टम कराने से इंकार कर दिया। इसलिए 6 बच्चों के शवों का पोस्टमार्टम कराया जा सका है। हलाकि जितने भी बच्चों की मौत हुई है सभी के आंकड़े नाम पता दुरुस्त हैं।

चित्तीदार और बाहर दांत निकले हिंसक जानवरों ने किया हमला

अधिकतर मामलों में हिंसक जानवरों ने गले पर हमला (जगलर वेन नष्ट करना) बच्चों की जान ली। यह काम शहरी क्षेत्रों के पशुओं का नहीं हो सकता। यह आदत जंगली हिंसक वन्यजीवों में होती है। कुत्तों के हमले में विनोद नोचकर पंजा मारकर नुकसान पहुंचा सकते हैं न कि गले को सीधा टारगेट बनाकर। मारे गए सभी पीड़ित बच्चे ही हैं जो कि हिंसक वन्यजीवों के लिए आसान टारगेट हैं। टीम के सदस्यों ने पीड़ितों से बातचीत में पाया कि उन्होंने चित्तीदार कुत्ते से ऊंचे जानवर बाहर दांत निकले वाले जानवर देखे जो उन पर हमला करके भागे। इनसे प्रतीत होता है कि वहां वारदातों में कुत्तों के अलावा अन्य हिंसक जानवरों की भी भूमिका है।

पशु प्रेमियों ने प्रदर्शन की दी चेतावनी

नगर के पशु प्रेमियों ने एनिमल वेलफेयर बोर्ड ऑफ इंडिया के नेतृत्व में धरने की चेतावनी दी है। पशु प्रेमी संस्था एमआरएसपी प्रदीप पात्रा ने खैराबाद इलाके में कुत्तों के अलावा कुत्तों के खिलाफ चल रहे अभियान के तरीके पर आपत्ति जताई। उन्होंने बताया कि प्रशासन को नियमों से काम करना चाहिए। टीम ने शनिवार को दौरा कर हाल चाल लिया। टीम ने खैराबाद से आगे गुरपलिया गांव में पड़ताल की तो पाया कि लोग लाठी-डंडों, अस्त्रों के अलावा बिजली करंट लगाकर कुत्तों से निपट रहे हैं। उन्होंने बताया कि सोमवार-मंगलवार में सीतापुर जाकर उनकी टीम जिलाधिकारी और पीड़ितों से मुलाकात करेंगी समिति की सभा खान सोनल चतुर्वेदी ने बताया कि डॉक्टर्स की टीम ने अगर रवैया नहीं सुधरा तो धरना प्रदर्शन भी करेंगे।

करीब 20 किलोमीटर की दूरी तय कर हमला

तालगांव में हमला करने के बाद कुत्तों ने 2 घंटे में 20 किलोमीटर तक का सफर तय कर दूसरा हमला किया। इससे साफ है कि कुत्ते लंबी दूरी चलकर हमला कर रहे हैं। बता दें कि तालगांव में जिस भगवतीपुर में कुत्तों ने हमला कर मासूम कासिम की जान ले ली। उस भगवतीपुर से शहर कोतवाली का क्षेत्र बिहारीगंज गांव करीब 20 किलोमीटर की दूरी पर मौजूद है। बावजूद इसके आदमखोरों का झुंड बिहारीगंज के करीब पहुंचा और यहां पर इरफान के पुत्र दानिश पर हमला करके उसे घायल कर दिया।

ग्रामीण बोले- कुत्तों की मौत ही अंतिम विकल्प

आदमखोर कुत्तों को लेकर जहां प्रशासन का जोर है कि कुत्तों को जिंदा पकड़ा जाए। उसके बाद उन्हें किसी जंगल में जिंदा ही छोड़ दिया जाए।वहीं क्षेत्र के नागरिकों का कहना है कि इन आदमखोर कुत्तों को मार देने में ही भलाई है। लोगों का तर्क है कि अगर इन कुत्तों को जिंदा छोड़ा गया तो यह कुत्ते वहां भी आतंक मचा सकते हैं। इसलिए इनको मारने से ही समस्या जड़ से खत्म हो जाएगी।

बच्चों को स्कूल के अंदर तक छोड़ें- डीएम

आदमखोर कुत्ते बच्चों पर हमला कर रहे हैं। इस पर डीएम ने डीआईओएस को निर्देश दिए हैं कि जिसमें कहा गया है कि स्कूली बच्चे जब बच्चे उतर कर स्कूल के अंदर जाते हैं तो स्कूल के गेट तक पहुंचाने की जिम्मेदारी क्लीनर की तरह की जाए। अभिभावक भी अपने बच्चों को स्कूल के अंदर तक छोड़े। अपने बच्चे को बाहर न जाने दें अगर चाहते हैं तो उनके साथ जरूर जाएं सुरक्षा के इंतजाम अपने साथ रखें।

कुत्तों को गले में पहना दें पट्टा-जिलाधिकारी

आदमखोर आदमखोर कुत्तों के आतंक से रोजाना बच्चों की हो रही मौत पर डीएम ने पहचान का नया तरीका निकाला है। उन्होंने लोगों से अपील की है कि अगर कोई कुत्ता अपने घर पर आता है तो उसके गले में पट्टा पहना दे। इससे इसकी पहचान हो सकेगी। इससे आदमखोर कुत्तों को पकड़ने में आसानी रहेगी। लेकिन सवाल उठता है कि आखिर इन को पट्टा पहन आएगा कौन? पट्टा पहनाने की किसी विभाग को जिम्मेदारी नहीं दी गई है। बल्कि सिर्फ जन सहयोग ही मांगा गया।

लखनऊ में हो रही खूंखार कुत्तों की नसबंदी

सीतापुर के खूंखार कुत्तों की लखनऊ में नसबंदी हो रही है। सीतापुर में बच्चों पर हमला करने वाले खूंखार कुत्तों की नसबंदी लखनऊ में की जा रही है। इसके लिए कुत्तों को सीतापुर से लखनऊ नगर निगम के कान्हा उपवन में लाया गया है। शनिवार को यहां बारिश कुत्तों को लाकर नसबंदी की गई। 48 घंटे के अंदर इन कुत्तों को वापस सीतापुर में उनकी मूल जगहों पर छोड़ दिया जाएगा। लखनऊ नगर निगम के मुख्य पशु चिकित्सक डॉक्टर अरविंद राव ने बताया कि सीतापुर में नसबंदी किए जाने की सुविधा नहीं है। इसके बाद डीएम सीतापुर में सचिव नगर विकास और नगर आयुक्त लखनऊ से मदद मांगी थी।

कान्हा उपवन में ही खाने-पीने का इंतजाम

जनहित को देखते हुए यह फैसला लिया गया कि वहां के कुत्तों को सीतापुर प्रशासन लखनऊ भेजें। यहां लखनऊ नगर निगम के कान्हा उपवन में उन्हें रखकर नसबंदी की जा रही है। डॉ राव का कहना है कि कानून के मुताबिक आवारा कुत्तों को पकड़ कर केवल नसबंदी की जा सकती है। उनको मूल निवास स्थान से हटाया नहीं जा सकता। नसबंदी के बाद वापस इन कुत्तों को सीतापुर ही भेज दिया जाएगा। अभी तक 22 कुत्ते हमें मिल चुके हैं। आगे भी सीतापुर प्रशासन ज्यादा कुत्ते भेजेगा। इनके खाने-पीने का इंतजाम भी हम कान्हा उपवन में करा रहे हैं।

खर्च उठाएगा सीतापुर प्रशासन

कुत्तों को सीतापुर से लखनऊ लाने और इसकी नसबंदी कराने का खर्च वहां का जिला प्रशासन उठाएगा। इसके लिए खुर्द जिला अधिकारी ने सीतापुर नगर निगम को को आश्वस्त किया है। खुद जिलाधिकारी सीतापुर इस मामले में निगरानी कर रहे हैं। जिला प्रशासन की टीम ही कुत्तों को पकड़ कर अपने वाहनों से लखनऊ पहुंचा रही है।

रविवार से टीम ने शुरू किया काम

सीतापुर आदमखोर कुत्तों से निपटने के लिए शनिवार को लखनऊ नगर निगम की एक टीम खैराबाद पहुंची। टीम में नगर निगम के नरेंद्र शर्मा, छोटेलाल वह हसीन शामिल हैं। टीम के पास डॉग कैचर व जाली लगा एक वाहन मौजूद है। टीम के सदस्य ने बताया कि डॉग कैचर से कुत्तों को पकड़ा जा रहा है। जिसके बाद उनको वाहन में भरकर निश्चित स्थान पर छोड़ा जाएगा। ताकि वह कुत्ते किसी को नुकसान ना पहुंचा सके। टीम ने रविवार की सुबह से अपना काम शुरु कर दिया है।

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I am currently working as State Crime Reporter @uttarpradesh.org. I am an avid reader and always wants to learn new things and techniques. I associated with the print, electronic media and digital media for many years.