सिन्धु घाटी सभ्यता से जुड़ाव रखने वाला और किसी ज़माने में कौशल राज का अन्न भण्डार रहा बांसगाँव के गोरखपुर जिले की एक तहसील है| यह लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र होने के साथ-साथ विधानसभा सीट भी है| पंजाब के बाद एक पट्टी में सबसे ज्यादा गेंहू इसी क्षेत्र में होते है| |यहाँ प्रशासनिक और राजनितिक हर तरह के संसाधन दिखते है मगर विकास नहीं दिखता| यही कारण है की लम्बे समय से इसे क्षेत्र को जिला बनाने की मांग उठ रही है| श्रीनेत राजपूतों के निवास केंद्र के रूप में बांसगाँव विख्यात है|

श्रीनेत राजपूतों अश्विन महीने में अपनी वर्षों पुरानी परंपरा की वजह से भी जाने जाते है| परंपरा के अनुसार राजपुताना महिलायें अष्टमी के दिन जमा होकर माँ दुर्गा की आराधना करती है और श्रीनेत राजपूत नवमी को बांसगाँव की कुलदेवी को अपना खून चढ़ाते है|

बांसगाँव यूपी के सबसे पुराने तहसीलों में से एक है| 2011 की जनगणना के मुताबिक़ यहाँ की आबादी 4,47,172 है जिसमे पुरुषों की संख्या 2,24,553 और महिलाओं की संख्या 2,22,619 है| यहाँ कुल 65 हज़ार परिवार रहते है| यूपी के लिंगानुपात 912 के मुकाबले यहाँ प्रति 1000 पुरुषों पर 991 महिलायें है| कुल आबादी में से 3.4% लोग शहरों में जबकि 96.6% लोग गाँवों में रहते है| यहाँ की औसत साक्षरता दर 71.35% है जिसमे पुरुषों की साक्षरता दर 82.88% और महिलाओं की साक्षरता दर 59.89% है| राष्ट्रीय राजमार्ग 28 और राष्ट्रीय राजमार्ग 29 इस जिले के पास से होकर गुजरता है| बांसगांव देश के 250 अति पिछड़े जिलों में आता है| यह यूपी का 34वां जिला है जिसे अति पिछड़ा अनुदान निधि कार्यक्रम के तहत सहायता मिलती है|

बांसगाँव लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र उत्तर प्रदेश की 80 लोकसभा सीटों में से 67वें नंबर की सीट है| अस्तित्त्व में आने के बाद से ही यह सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित रही है| बांसगाँव लोकसभा में यूपी विधानसभा की कुल पांच सीटें आती है-

चौरीचौरा, बांसगाँव, चिल्लूपार, रुद्रपुर और बरहाज

बांसगांव की विधानसभा सीट अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है|

bansgaon
वर्तमान में यहाँ से भाजपा के कमलेश पासवान हैं.

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1962 में यहाँ पहली बार चुनाव हुए| उन दिनों यह यूपी की 38वीं लोकसभा सीट हुआ करती थी| यहाँ 1962 में हुए आमचुनावों में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के महादेव प्रसाद ने जीत दर्ज की|1967 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी, 1971 में कांग्रेस और 1977 में भारतीय लोकदल ने यह सीट अपने नाम की|  1980 में महावीर प्रसाद ने कांग्रेस(आई) और 1984 और 1989 में कांग्रेस के टिकट पर लगातार तीन बार जीत दर्ज की| 1991 में राज नारायण ने भारतीय जनता पार्टी को यहाँ पहली बार जीत दिलाई| 1996 में चुनाव जीतकर समाजवादी पार्टी की सुभावती देवी बांसगाँव की पहली महिला सांसद बनी 1998 और 1999 में एक बार फिर राज नारायण ने भारतीय जनता पार्टी को यहाँ जीत दिलाई| 2004 में कांग्रेस के महावीर प्रसाद बसपा के श्रीनाथ जी को हराकर लोकसभा पहुंचे| 2009 और 2014 के लोकसभा चुनाव भारतीय जनता पार्टी के कमलेश पासवान जीतकर लोकसभा के लिए निर्वाचित हुए| गोरखपुर में जन्मे कमलेश पासवान सोलहवीं लोकसभा में खाद्य, उपभोक्ता मामलों, वाणिज्य और जन वितरण प्रणाली की स्थाई समिति के सदस्य है|

लोकसभा वर्ष पार्टी नाम
तीसरी 1962 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महादेव प्रसाद
चौथी 1967 संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी मोलाहू
पांचवीं 1971 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस राम सूरत
छठीं 1977 भारतीय लोक दल फिरंगी प्रसाद
सातवीं 1980 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस(आई) महावीर प्रसाद
आठवीं 1984 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महावीर प्रसाद
नौवीं 1989 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महावीर प्रसाद
दसवीं 1991 भारतीय जनता पार्टी राज नारायण
ग्यारहवीं 1996 समाजवादी पार्टी सुभावती देवी
बारहवीं 1998 भारतीय जनता पार्टी राज नारायण पासी
तेरहवीं 1999 भारतीय जनता पार्टी राज नारायण पासी
चौदहवीं 2004 भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस महावीर प्रसाद
पंद्रहवीं 2009 भारतीय जनता पार्टी कमलेश पासवान
सोलहवीं 2014 भारतीय जनता पार्टी कमलेश पासवान
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