आलमबाग सवारी व माल डिब्बा वर्कशॉप में लगी आग, तीन कर्मचारी झुलसे

Three Employees Scorched fire at Wagon Workshop Alambagh

राजधानी लखनऊ के आलमबाग स्थित सवारी व माल डिब्बा कारखाना गुरुवार को एक बड़ा हादसा होते होते बचा। यहां वर्कशाप में रिपेयरमेंट के लिए आए कोच नंबर 13881 में काम चल रहा था। तभी अचानक फ्लोरिंग शिट चिपकाने वाले सुलेशन में चिंगारी से आग लग गई। घटना में दो तकनीशियन गंभीर रूप से जल गए। वहीं, एक तकनीशियन आग के चपेट में आ गया। घटना से मौके पर हड़कंप मच गया। काम कर रहे कर्मचारी भाग खड़े हुए। काफी देर बाद आग को काबू में किया जा सका। घायल तीनों कर्मचारियों को रेलवे हॉस्पिटल चारबाग में भर्ती कराया गया है।

इस घटना में रेलवे प्रशासन की घनघोर लापरवाही सामने आयी है। सूत्रों के मुताबिक, कारखाने में आउट सोर्सिंग के नाम बाहर के लोगों से काम कराया जा रहा है। आए-दिन होती घटनाओं में बाहर के लोग भी घायल हो रहे हैं, जिनका गुपचुप तरीके से बाहर के अस्पतालों में इलाज कराया जा रहा है। एनआरएमयू ने सुरक्षा व्यवस्था के सवाल पर अनेकों गम्भीर आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। साथ ही प्रशासन के खिलाफ प्रदर्शन की घोषणा की है। इस घटना से वर्कशॉप प्रशासन की लापरवाही सामने आ रही है, फिलहाल पूरे प्रकरण की जांच की जा रही है।

देखते ही देखते मच गई अफरा-तफरी

जानकारी के मुताबिक, वर्कशाप के भार लाइन के लाइन नंबर दो पर कोच नंबर 13881 पर रिपेयर का काम हो रहा था। जिसमे कर्मचारी सुदीप उपाध्याय टिकट नंबर 227 ए व रामरूप मीना टिकट नंबर 1163 ए कोच के फर्श पर फ्लोरिंग शिट लगा रहे थे। वहीं, पास में ही वेल्डिंग काम भी चल रहा था, जिसकी चिंगारी कोच के अंदर पहुंच। जिसके चलते फ्लोरिंग शिट को चिपकाने वाले सुलेशन में आग पकड़ ली। घटना में दोनों कर्मचारी जल गए। वहीं, बाहर काम कर रहे कर्मचारी ऋषिपाल 161 बी इसी आग के चपेट में आ गए। चीखपुकार सुनते ही मौके पर सभी आला अफसर व कर्मचारी जमा हुए। देखते ही देखते अफरा-तफरी मच गई। तीनों घायलों का इलाज रेलवे हॉस्पिटल चारबाग में कराया गया रहा है।

इस घटना पर एनआरएमयू के शाखा मंत्री अरुण गोपाल मिश्रा ने प्रसाशन को दोषी मानते हुए कहा कि प्रशासन की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई है। प्रसाशन काम को जल्दी कराने के चक्कर में सुरक्षा व्यवस्था को नजरअंदाज कर रहा है। प्रसाशन दावा करता है कि सुरक्षा में हीरो दुर्घटना में जीरो, जिसका स्लोगन कारखाने की दीवारों पर लिखा दिख जाएगा। लेकिन स्थिति इसके ठीक विपरीत है। उन्होंने कहा कि प्रसाशन कई ऐसी घटनाएं छिपा देता है। लगभग 15 दिन पहले सीजीटी कर्मचारी रजत को दीवाल पेंटिंग के लिये लगा दिया, जो उसका काम भी नहीं था। वह कर्मचारी भी गम्भीर रूप से घायल हो गया है। जिसका अभी भी इलाज चल रहा है। इस संदर्भ में यूनियन ने एसएसई पर कारवाई के लिये चिठ्ठी भी लिखा है, मगर अभी तक कोई एक्शन नहीं लिया गया है।

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