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Tag : Literature

व्यंग्य

व्यंग: अटल पर इरादे ?

Krishnendra Rai
नाम में तब्दीली । पुन: प्रयागराज ।। कुंभ है नज़दीक । चुनावी आग़ाज़ ।। हमारा है सवाल । पूरे हुए वादे ? बदल डालो नाम
व्यंग्य

व्यंग: करो पुलिस सुधार !

Krishnendra Rai
करो पुलिस सुधार । सबका पड़ता पाला ।। वर्तमान ज़रूरत । प्रस्तुति निराला ।। असाध्य बना मर्ज़ । दिशाहीन प्रशिक्षण ।। समाज रहा निहार ।
व्यंग्य

पनपाओ भाईचारा !

Krishnendra Rai
पनपाओ भाई-चारा । ना तुम भड़काओ ।। सड़ी-गली मानसिकता । घर रख कर आओ ।। माफ़ ना करेगा । तुमको ये मुल्क ।। गवाह है
व्यंग्य

व्यंग: ना छोड़ो ईरान !

Krishnendra Rai
सजग रहना भारत । ना छोड़ो ईरान ।। अमरीका का चक्कर । घटा देगा शान ।। रहे ख़रीदी जारी । तेल ईरान वाला ।। बच
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कविता: ऐ छप्पन इंच !

Krishnendra Rai
एक के बदले दस । जोश पड़ा ठंडा ? ऐ छप्पन इंच । कब उठेगा डंडा ? काँप रही रूह । ग़ुस्से में आवाम ।।
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कविता: ना करना अतिक्रमण !

Krishnendra Rai
ना हमें आपत्ति । ले आओ आरक्षण ।। राजधर्म निभाना । ना करना अतिक्रमण ।। करो समाज सुधार । इतना रखना ख़याल ।। अगर बिगड़ा