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Tag : साहित्य

व्यंग्य

हादसा ये अमृतसर !

Krishnendra Rai
त्राहिमाम-त्राहिमाम । सस्ती हुई जान ।। घोर लापरवाही । हर लिए प्राण ।। असह्य अब पीड़ा । हादसा ये अमृतसर ।। जो भी ज़िम्मेदार ।
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व्यंग: एफ़आईआर यात्रा !

Krishnendra Rai
दर्ज एफ़आइआर । पर हुआ विलंब ।। अमर और आज़म । छिड़ गयी जंग ।। जान की धमकी । धार्मिक उन्माद ।। एफ़आइआर यात्रा ।
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व्यंग: बेपटरी अब रेल

Krishnendra Rai
बेपटरी अब रेल । लापरवाही चरम ।। शक हो रहा रेलवे । ना निभाते धरम ।। मुआवज़ा-निलंबन । सुनते केवल कान ।। तरस गयीं आँखें
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व्यंग: ना छोड़ो ईरान !

Krishnendra Rai
सजग रहना भारत । ना छोड़ो ईरान ।। अमरीका का चक्कर । घटा देगा शान ।। रहे ख़रीदी जारी । तेल ईरान वाला ।। बच
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व्यंग: चल गया सोटा !

Krishnendra Rai
ज़िद्दी आधार । सुप्रीम ने लपेटा ।। ना करो मनमानी । चल गया सोटा ।। रहेगी अहमियत । ना करो मजबूर ।। उतर गया देखो
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व्यंग: समाजवाद विखराव!

Krishnendra Rai
हुए दो फाड़ । वर्चस्व की जंग ।। होना ये अलग । लाएगा उमंग ? फट गया पोस्टर । नेताजी नदारद ।। समाजवादी मोर्चा ।
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व्यंग: कुर्सी ली अँगड़ाई ?

Krishnendra Rai
रैलियों का दौर । मंच हो रहे साझा ।। कोई मानसरोवर । और कोई ख्वाजा ।। सिंहासन की जंग । विरासत की लड़ाई ।। हवा
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कविता: ऐ छप्पन इंच !

Krishnendra Rai
एक के बदले दस । जोश पड़ा ठंडा ? ऐ छप्पन इंच । कब उठेगा डंडा ? काँप रही रूह । ग़ुस्से में आवाम ।।
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व्यंग: हर वर्ग सिरमौर ?

Krishnendra Rai
भागवत उवाच । नया हिन्दुत्व ।। समझायी परिभाषा । मुसलमान महत्व ।। नागपुर तटस्थ । करता ना दखल ।। राजनीति से दूरी । नयी ये
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व्यंग: चुनाव की ये बेला..

Krishnendra Rai
चुनाव की ये बेला  । दोषारोपण जारी  ।। उछालना कीचड़ । प्राथमिकता हमारी ।। भटक रहे मुद्दे । वादों की अनदेखी ? करना दो-दो हाथ