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Tag : कविता

व्यंग्य

हादसा ये अमृतसर !

Krishnendra Rai
त्राहिमाम-त्राहिमाम । सस्ती हुई जान ।। घोर लापरवाही । हर लिए प्राण ।। असह्य अब पीड़ा । हादसा ये अमृतसर ।। जो भी ज़िम्मेदार ।
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व्यंग: बेपटरी अब रेल

Krishnendra Rai
बेपटरी अब रेल । लापरवाही चरम ।। शक हो रहा रेलवे । ना निभाते धरम ।। मुआवज़ा-निलंबन । सुनते केवल कान ।। तरस गयीं आँखें
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व्यंग: समाजवाद विखराव!

Krishnendra Rai
हुए दो फाड़ । वर्चस्व की जंग ।। होना ये अलग । लाएगा उमंग ? फट गया पोस्टर । नेताजी नदारद ।। समाजवादी मोर्चा ।
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व्यंग: कुर्सी ली अँगड़ाई ?

Krishnendra Rai
रैलियों का दौर । मंच हो रहे साझा ।। कोई मानसरोवर । और कोई ख्वाजा ।। सिंहासन की जंग । विरासत की लड़ाई ।। हवा
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कविता: ऐ छप्पन इंच !

Krishnendra Rai
एक के बदले दस । जोश पड़ा ठंडा ? ऐ छप्पन इंच । कब उठेगा डंडा ? काँप रही रूह । ग़ुस्से में आवाम ।।
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व्यंग: हर वर्ग सिरमौर ?

Krishnendra Rai
भागवत उवाच । नया हिन्दुत्व ।। समझायी परिभाषा । मुसलमान महत्व ।। नागपुर तटस्थ । करता ना दखल ।। राजनीति से दूरी । नयी ये
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व्यंग: चुनाव की ये बेला..

Krishnendra Rai
चुनाव की ये बेला  । दोषारोपण जारी  ।। उछालना कीचड़ । प्राथमिकता हमारी ।। भटक रहे मुद्दे । वादों की अनदेखी ? करना दो-दो हाथ
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व्यंग: जानती ये दुनिया !

Krishnendra Rai
गर्म हुआ बाज़ार । माल्या और जेटली ।। केवल हैंडशेक । या चर्चा चली ? अगर इमानदार । तुम माल्या बाबू ।। था करना सामना
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कविता: घुस आये चीनी…

Krishnendra Rai
घुस आये चीनी । हो गया ख़ुलासा ।। कठोर करो उपाय । ना केवल दिलासा ।। घोर लापरवाही । चिंता का विषय ।। बस केवल
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Kumar
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