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Neelam Sonakr adopted Lohara, Surhan in sansad adarsh gram yojna (Star Rating : 0)

प्रधानमंत्री की महत्वकांक्षी सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत लालगंज की सांसद नीलम सोनकर ने आजमगढ़ जिले के लोहरा गाँव को 2014 में गोद लिया था. 1857 के स्वतंत्रता संग्राम में योगदान देने वाला यह गाँव हमेशा से ऐतिहासिक महत्त्व रखता आया है. इस गाँव के लोग अभी मूलभूत सुविधाओं के न होने का दंश झेल ही रहे थे की सांसद महोदया ने मार्टिनगंज मुख्यालय से सटी सुरहन तहसील को आदर्श ग्राम के रूप में गोद ले लिया.

नगर क्षेत्र के ठंडी सड़क स्थित एक होटल में पत्रकारों से बातचीत (Nov 2014 ) में  नीलम सोनकर ने कहा कि अब भी काफी संख्या में लोग गांवों मंे रहकर कृषि कार्य करते हैं। महात्मा गांधी मानते थे कि देश की खुशहाली का रास्ता गांवों के विकास से होकर गुजरता है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व की सरकारों की अदूरदर्शिता के चलते गांवों का जैसा विकास होना चाहिए वैसा नहीं हो सका। ग्रामीण इलाकों की दुर्दशा के चलते ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गांवों के विकास का वीणा उठाया है। नीलम ने कहा कि सांसद आदर्श ग्राम योजना के तहत उन्होंने लोकसभा के तहत आने वाले अतरौलिया विधानसभा क्षेत्र के लोहरा गांव का चयन किया है। यह स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गांव रहा है। यहां कई स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रहे। काफी समय पहले गांधी ग्राम योजना के तहत इसका चयन किया गया था लेकिन गांव का अपेक्षित विकास नहीं हुआ। इस गांव में हर वर्ग और बिरादरी के लोग हैं। सांसद ने कहा कि गोद लिए गए गांव का विकास करने का मतलब यहां बेसिक जरूरतों को पूरा करने से लेकर उद्योग लगाकर रोजगार देने की व्यवस्था करना है। चयनित गांव का सर्वांगीण विकास किया जाएगा।

Neelam Sonakr adopted Lohara, Surhan in sansad adarsh gram yojna

REALITY CHECK : SANSAD ADARSH GRAM YOJANA (SAGY) OF UTTAR PRADESH

सुरहन गाँव दीदारगंज विधानसभा की सबसे बड़ी ग्राम पंचायत है. इस गांव ने जिले को एक नहीं बल्कि तीन-तीन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी दिए। आजादी के 71 साल बाद भी गांव में विकास की किरण नहीं पहुंच सकी है। 21 नवंबर 2016 को भाजपा सांसद नीलम सोनकर ने इस गांव को सांसद आदर्श गांव के रुप में गोद लिया। तकरीबन डेढ़ साल बीत जाने के बाद भी आज गाँव में न जाने का रास्ता है, न जल निकासी की व्यवस्था और न ही पीने का साफ़ पानी. यहाँ विकास केवल फाइलों में दौड़ रह है.

विकास के नाम पर सुरहन में गाँववालों को 155 आवास और मात्र 25 शौचालय मिले है,इनमे से अधिकांश अब भी अधूरे ही है. बिजली विभाग की टीम ने कुछ दिनों पहले गाँव का मुआयना किया था मगर बात केवल मुआयने तक ही सीमित रह गयी. 2007 में यहाँ स्वजलधारा योजना के 20 लाख रुपये आवंटित हुए थे मगर गाँव वालों को अबतक साफ़ जल नसीब न हो सका. गाँव में विकास की रफ़्तार बहुत धीमी है. स्थानीय सांसद धीमी रफ़्तार का दोष अधिकारियों को देती है.

कुल मिलाकर 2016 तक जहाँ नीलम सोनकर के गोद लिए एक गाँव को आदर्श बन जाना था वहीँ आज उनके गोद लिए दोनों गाँव केवल नाम से ही आदर्श है.

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