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वायु गुणवत्ता सूचकांक (ए.क्यू.आई) से आपको क्या पता चलता है?

गरिमा पराशर

बेंगलुरु, कर्नाटक:

2015 से, भारत में राष्ट्रीय वायु गुणवत्ता सूचकांक (ए.क्यू.आई) का उपयोग करके वायु प्रदूषण को मापा जा रहा है, जो की पुरे दिन या क्षेत्र में प्रदूषण का औसत बताता है । यह पीएम 10 और पीएम 2.5 जैसे कई वायु प्रदूषकों को भी ध्यान में रखता है। विशेषज्ञों का कहना है की हमें आसानी और डाटा की स्पष्टता के लिए  केवल एक प्रदूषक – पीएम 2.5 को ध्यान में रखना चाहिए।

“अगर आप सवाल पूछते हैं की, “क्या समय के साथ हवा की गुणवत्ता में सुधार हुआ है? “, मुझे नहीं पता कि क्या मैं इसका जवाब देने के लिए एक्यूआई का उपयोग कर सकता हूं। यह कोई सीधा तरीका नहीं है। कई प्रदूषकों को मापना सहायक हो सकता है, लेकिन हमें हर समय प्रमुख प्रदूषकों पर ध्यान देना चाहिए, जो कि भारत में पीएम 2.5 है। “जनता और निर्णय लेने वाले लोगो तक उचित बात पहुंचने क लिए यह ज़रूरी है की हवा की गुडवत्ता मांपने के लिए हमें एक ही प्रदूषक और उसकी हवा में मात्रा को ही केंद्र में रखना चाहिए।”, सेंटर फॉर पॉलिसी रिसर्च के साथी संतोष हरीश कहते हैं।

एक्यूआई जो की आधार माना जाता है वायु प्रदर्शन में बढ़ोत्तरी यह घटोत्तरी का, कई सारे प्रदूषकों को मांपता है और एक निश्चित समय में सबसे खराब प्रदर्शन करने वाले प्रदूषक पर अनुक्रमित करता है, जो की विशेषज्ञों को काफी भ्रमित करने वाला लगता है। 

अधिकांश उत्तरी शहरों में, पीएम 2.5 का स्तर काफी ज़्यादा है और विशेषज्ञों का मानना ​​है कि वायु गुणवत्ता जानने के लिए आठ प्रदूषकों को मापने के बजाय प्रदूषण स्तर के संकेतक के रूप में इसका उपयोग किया जाना चाहिए। इसके अलावा, यदि विचार जागरूकता बढ़ाने के लिए है, तो आठ प्रदूषकों  के बारे में बात करने से लोग भ्रमित हो सकते हैं।

मॉनिटरिंग स्टेशनो की भारी कमी 

केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (सी.पि.सी.बी) के दिशानिर्देशों के अनुसार, भारत को एक्यूआई को मापने के लिए कम से कम 4,098 कॉम्पैक्ट एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग स्टेशन (सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस) की आवश्यकता है लेकिन हमारे पास केवल 200 ऐसे स्टेशन हैं। सिर्फ इतना ही नहीं, 16 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को अभी भी अपने पहले मॉनिटरिंग स्टेशन का इंतजार है।

इसके अतिरिक्त ज़्यादातर शहरों में सिर्फ एक ही स्टेशन है प्रदुषण की निगरानी के लिए। सांख्यिकीय रूप से, ऐसे नमूने महत्वहीन हो सकते हैं और हवा की गुणवत्ता की गलत तस्वीर को पेश कर सकते हैं।

क्लीन एयर कलेक्टिव के समन्वयक, बृकेश सिंह के अनुसार, अधिक संख्या में मॉनिटर अच्छे डाटा को बाधित करते हैं। “जबकि कम लागत वाले सेंसरों द्वारा एकत्र किया गया डाटा सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस के समान सटीक नहीं हो सकता है, जब प्रदूषण का स्तर हमारे जितना अधिक होता है, तो मामूली अंतर मायने नहीं रखते। जो देश इस समस्या से सफलतापूर्वक निपटने में सक्षम है, उन्होंने हमेशा आम जनता द्वारा उपयोग किए जाने वाले उपकरणों द्वारा उत्पन्न डेटा को प्रोत्साहित और स्वीकार किया है। ऐसे सेंसर स्थानीय कैंपेनों को चलाने के लिए नागरिकों को कम कीमत पर पर्याप्त डाटा प्रदान करते हैं, लोगों और नागरिक समूहों के बीच जागरूकता पैदा करते हैं और बातचीत की शुरुआत करते हैं। अअगर शहर में यह कई स्तर पर होता है तो यह काफी प्रभावी रहेगा ,” सिंह बताते हैं।

सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस की औसत लागत लगभग 1 करोड़ रुपये होने की वजह से, कम लागत वाले सेंसर-आधारित मॉनिटर ज़्यादा मजबूत हैं। संतोष का कहना है कि यह महत्वपूर्ण है कि निगरानी स्टेशनों का नेटवर्क मुट्ठी भर शहरों से परे निकलकर अन्य शहरों और औद्योगिक क्षेत्रों में भी फैले

निगरानी उपकरणों के प्रकार

दो प्रकार के निगरानी उपकरण हैं – एस.ई.एम (सरफेस एमिशन मॉनिटरिंग) और परिवेश निगरानी उपकरण जिन्हें सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस  (कंटीन्यूअस एयर क्वालिटी मॉनिटरिंग) कहा जाता है। एस.ई.एम का उपयोग स्रोत प्रदूषण माप के लिए किया जाता है। उदाहरण के लिए, उद्योगों और कारखानों से होने वाला प्रदूषण। ऐसे डाटा को सीधे सी.पि.सी.बी कि साइट पर अपलोड किया जाता है। यह स्रोत से उत्सर्जन की निगरानी करता है और ए.क्यू.आई से अलग है, हालांकि यह समान मापदंडों को मापता है। ए.क्यू.आई की गणना सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस में एकत्रित डाटा से की जाती है जो US EPA मानक वाले उपकरण का उपयोग करता है। देश भर में ऐसे 200 से अधिक सी.ऐ.क्यू.ऍम.एस उपलब्ध हैं, जिनमें से अधिकांश दिल्ली और उसके आसपास स्थापित हैं।

विवरण -(सी.पि.सी.बी, अर्बन इम्मीशन)

 

राज्य 2017 में सेंसर की संख्या आवश्यक सेंसरों की संख्या वर्तमान में सेंसरों की संख्या
जम्मू और कश्मीर 0 91 0
हिमाचल प्रदेश 0 43 0
चंडीगढ़ 0 7 1
उत्तराखंड 0 64 0
सिक्किम 0 4 0
अरुणाचल प्रदेश 0 4 0
नगालैंड 0 20 0
मणिपुर 0 25 0
मिजोरम 0 9 0
त्रिपुरा 0 21 0
मेघालय 0 25 1
असम 0 143 1
छत्तीसगढ़ 0 103 0
मध्य प्रदेश 0 303 13
दमन और दीव 0 4 0
दादरा और नगर हवेली 0 4 0
गोवा 0 11 0
लक्षद्वीप 0 4 0
पुडुचेरी 0 10 0
अंडमान और निकोबार द्वीप 0 4 0
झारखंड 1 140 1
गुजरात 1 197 5
केरल 1 115 2
ओडिशा 2 169 2
पंजाब 3 125 8
राजस्थान Rajasthan 3 226 10
बिहार 3 277 3
तमिलनाडु 3 255 5
हरियाणा 4 123 24
पश्चिम बंगाल 5 197 12
आंध्र प्रदेश 5 126 5
कर्नाटक 5 209 17
तेलंगाना 6 97 6
उत्तर प्रदेश 9 558 24
महाराष्ट्र 9 308 22
दिल्ली के एन.सी.टी. 14 77 38

(गरिमा, बेंगलुरु में स्वतंत्र पत्रकार हैं और 101Reporters.com कि सदस्य हैं।)

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