एक और रेप की वारदात, गुजरात में 11 साल की बच्ची की रेप के बाद हत्या

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भाजपा सरकार की नाकामयाबी कहे, या अपराधों के प्रति उनकी गैरजिम्मेदारी कि देश में रेप के केसों के मामले बढ़ते ही जा रहे है. इस समय के 3 बड़े रेप केस लगातार सुर्ख़ियों में है और यह तीनों ही सरकार से कही ना कही जुड़े हुए. उन्ही में अब एक और रेप का मामला सामने आया है. गुजरात में एक बच्ची के साथ रेप की वारदात को अंजाम दिया गया. और फिर उसकी हत्या कर दी गयी.

8 दिन तक हुआ रेप, फिर की हत्या

उत्तर प्रदेश के उन्नाव और जम्मू के कठुआ रेप कांड के बाद एक और शर्मनाक मामला सामने आया है। मामला प्रधानमंत्री के गृह राज्य और प्रदेश में भाजपा सरकार वाले गुजरात का है, जहाँ एक 11 साल की बच्ची के साथ दुष्कर्म किया गया. बच्ची के साथ आठ दिनों तक रेप की घटना को अंजाम दिया गया. और उसके बाद उसकी हत्या कर दी गयी.

पोस्टमार्टम रिपोर्ट में इस बात का खुलासा हुआ कि बच्ची के साथ 8 दिनों तक रेप किया गया. नाबालिग बच्ची से दुष्कर्म की यह हैवानियत इतनी दर्दनाक थी जिसका जिक्र पोस्टमार्टम रिपोर्ट में करते हुए बताया गया कि बच्ची के शरीर पर 80 जख्म पाए गये है.

कठुआ रेप केस:

जम्मू- कश्मीर के कठुआ इलाके में भी एक मासूम बच्ची के साथ कई दिनों तक सामूहिक रेप हुआ और फिर निर्ममता से उसकी हत्या कर दी गयी. इस मामले में असीफा नाम की उस नाबालिग बच्ची के गुनाहगारो को सज़ा मिलने के बजाए धर्म और जाति का मुद्दा बना दिया गया. एक बच्ची जिसकी आबरू गयी, जिंदगी गयी उससे ज्यादा जरुरी उसकी जाति बनाकर सियासत की जा रही है.

उन्नाव रेप केस:

वहीं उन्नाव रेप केस भी कम शर्मसार कर देने वाला नही है, जहाँ केस संज्ञान में आने के बाद भी उस पर कार्रवाई तब तक नही की गयी, जब तक पीड़ित के पिता की मौत नही हो गयी. वैसे कारवाई के आसार तो तब भी नही थे, पर सुप्रीम कोर्ट और इलाहाबाद हाई कोर्ट के स्वतः संज्ञान लेने और सरकार को फटकार लगाने के बाद कुछ कार्यवाई तो आगे बढ़ी. कम से कम आरोपी की गिरफ्तारी तो हुई. और इतना सब शुरू ना होने के पीछे का कारण… फिर वही सियासत. आखिर आरोपी कोई मामूली व्यक्ति नही. प्रदेश सरकार का बाहुबली विधायक जो है.

असीफा की तरह इस केस में भी सियासत. वहां धर्म की आंड में और यहाँ राजनीति की आड़ में. फिर क्या उमीद करे गुजरात की उस 11 साल की बच्ची के रेप केस. जहाँ आरोपी पता है. जहाँ सबूत, गवाह है, जहाँ पीड़ित चिल्ला चिल्ला कर अपना दर्द बयाँ कर रही है, जब वहां उनके लिए न्याय नही तो उस मासूम की मौत पर क्या कोई कार्रवाई होने की सम्भावना है. चलिए कार्यवाई भी हो जाये तो क्या आरोपी के पकड़े जाने की आशंका है, चलिए आरोपी पकड़ भी लिया जाये, तो क्या उसे उसके अपराध की सज़ा मिलने की आशंका है. जी बिलकुल है.

बशर्ते उसका कोई धर्म ना हो, राजनीति से तो दूर दूर तक ताल्लुक नहीं होना चाहिए. और सियासत एक बार फिर से अपराधी और कानून के बीच में ना आये.

बहरहाल इंतज़ार है कि देश की इन बेटियों को न्याय मिले. महिला सुरक्षा और सम्मान सच में महिलाओं, बच्चियों को मिल सके. पक्ष और विपक्ष सियासत छोड़ कम से कम इस मामले में तो एक होकर आपराधी को सज़ा दिलवा सके.

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