देश में सैनिकों की संख्या हो सकती हैं कम, सेना में डेढ़ लाख नौकरियों की कटौती

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देश की सुरक्षा में तत्पर थल सेना में कुछ बदलाव की खबरें आ रही हैं. रक्षा बजट का ज्यादातर सैनिकों की सैलरी में खर्च होने के चलते अब विभाग सैनिकों में ही कटौती करने की तैयारी में है. सूत्रों के मुताबिक़ रक्षा बजट के बेहतर इस्तेमाल के लिए सैनिकों की संख्या में कमी हो सकती हैं.  

सैनिकों की संख्या हो सकती हैं कम:

सूत्रों के मुताबिक, सेना प्रमुख चाहते हैं कि रक्षा बजट के बेहतर इस्तेमाल के लिए बेहद जरूरी है कि 12.6 लाख सैनिकों वाली सेना को थोड़ा छोटा किया जाए. क्योंकि अभी रक्षा बजट का करीब 83 प्रतिशत हिस्सा सैनिकों की सैलरी में खर्च हो जाता है.

12.6 लाख सैनिकों वाली हमारी थल सेना में अब सैनिकों में कमी किये जाने की सम्भावना हैं. आज थलसेना प्रमुख सभी सात वरिष्ठ सैन्य कमांडर्स के साथ राजधानी दिल्ली स्थित साउथ ब्लॉक में एक खास बैठक करने वाले हैं.

इस बैठक में सेना में करीब डेढ़ लाख सैनिकों की कटौती को लेकर चर्चा होगी. सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत आज बैठक में अपने कमांडर्स की इस मामलें में राय लेंगे.

रक्षा बजट के बेहतर इस्तेमाल के लिए उठा सकते हैं ये कदम:

गौरतलब है कि अभी थल सेना में 12 लाख से ज्यादा सैनिक हैं और रक्षा बजट का तकरीबन 83 फीसदी हिस्सा सैनिकों की सैलरी में व्यय हो जाता हैं. वहीं हथियार और सेना के अन्य जरुरी सामानों के लिए मात्र 17 फीसदी का मद ही शेष रहता हैं.

इसी लिए सेना प्रमुख चाहते हैं कि सैनिकों में कुछ कटौती की जाएँ, जिससे रक्षा बजट का बेहतर इस्तेमाल सेना के जरुरी सामानों और हथियारों के लिए किया जा सके.

4 स्टडी ग्रुप देने रिपोर्ट:

सेना मुख्यालय के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हाल ही में सेनाध्यक्ष ने सेना की ‘रिस्ट्रक्चरिंग’ यानि पुर्नगठन के लिए चार स्टडी-ग्रुप का गठन किया था.

एक-एक लेफ्टिनेंट जनरल की अध्यक्षता के नेतृत्व वाले ये स्टडी ग्रुप सेना की फील्ड फॉर्मेशन, सेना मुख्यालय, कैडर रिव्यू और जेसीओ रैंक के सैनिकों के काम करने के तरीकों से जुड़े हुए हैं.

माना जा रहा है कि जल्द ही ये चारो ग्रुप अपनी रिपोर्ट सेनाध्यक्ष को सौंप देंगे और फिर अक्टूबर के महीने में सेना के आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में इन सभी रिपोर्टिस पर चर्चा होगी.

जिसके बाद इन्हें रक्षा मंत्रालय की मंजूरी के लिए भेजा जायेगा.

ये चार स्टडी ग्रुप सेना के पुर्नगठन के लिए कर रहे काम:

  • सेना का पुर्नगठन (ब्रिगेडयर रैंक का खत्म करने पर विचार)
  • सेना मुख्यालय का पुर्नगठन (अलग अलग काम कर रहे कुछ अंगो को एक साथ मिलाया जायेगा)
  • ऑफिसर कैडर रिव्यू
  • जेसीओ रैंक के सैनिकों के काम करने के तरीकों पर पुर्नविचार

आज सेना प्रमुख करेंगे वरिष्ठ कमांडर्स के साथ बैठक:

लेकिन इससे पहले सेना प्रमुख अपने सभी सातों कमांडर्स से इस पर चर्चा करना चाहते थे. इसलिए मंगलवार को वे इन स्टडी ग्रुप्स और उनकी संभावित रिपोर्ट्स की समीक्षा करेंगे.

ये कम ही होता है कि सेनाध्यक्ष एक साथ सेना की सभी सातों कमांड के प्रमुखों से एक साथ मीटिंग करते हैं.

साल में दो बार होने वाली आर्मी कमांडर्स कांफ्रेंस में अमूमन सेना प्रमुख अपने कमांडर्स से वार्तालाप करते हैं.

लेकिन सेना के पुर्नगठन की समीक्षा के लिए वे मंगलवार को सभी सातो कमांडर्स से मीटिंग कर रहे हैं.

रक्षा बजट का 50 फीसदी भाग थल सेना का:

आपको बता दें कि रक्षा बजट का करीब 50 प्रतिशत थल सेना के हिस्से आता है. जबकि बाकी 50 प्रतिशत वायुसेना और नौसेना को मिलता है.

लेकिन क्योंकि थल सेना का स्वरूप बहुत बड़ा है, इसलिए रक्षा बजट का एक बड़ा हिस्सा सैनिकों की सैलरी और दूसरी जरूरतों पर खर्च हो जाता है.

मात्र 17 प्रतिशत ही सेना के हथियारों और सैन्य साजों सामान के लिए मिल पाता है.

17 फीसदी यानी 25 हजार सेना के हथियार खरीद फरोख्त पर खर्च:

इस साल यानि 2018-19 की बात करें तो इस बार का कुल रक्षा बजट करीब 2.95 लाख करोड़ था (सैनिकों की पेशन के लिए अलग से एक लाख करोड़ का बजट था).

इसमें करीब 1.50 लाख करोड़ अकेले थल सेना के हिस्से में आया था. जिसमें से मात्र 25 हजार करोड़ रूपये ही थलसेना के हथियारों की खरीद-फरोख्त के लिए आए.

हथियारों और अन्य सामानों की सेना को जरूरत:

सेना के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम 83:17 के इस अनुपात को हम कम से कम 65:35 तक लाना चाहते हैं. यानि रक्षा बजट का 65 प्रतिशत सैनिकों की सैलरी में खर्च हो और बाकी 35 प्रतिशत हथियार खरीदनें में हो.

अगर सेना अगले चार-पांच सालों में डेढ़ लाख सैनिकों की कटौती करने में कामयाब हुई तो कम से कम 5-8 हजार करोड़ रूपया बचाया जा सकता है.

बता दें कि वायुसेना और नौसेना में भी रक्षा बजट को खर्च करने का अनुपात करीब करीब 65:35 का ही है.

सैनिकों में कटौती से होगा 5 से 7 करोड़ की बजत:

लेकिन सैन्य अधिकारी ने बताया कि ये कटौती एकदम नहीं की जायेगी. इसे धीरे धीरे किया जायेगा. क्योंकि हर साल करीब 60 हजार सैनिक रिटायर हो जाते हैं लेकिन फिर बड़ी तादाद में सैनिकों की भर्ती भी होती है.

ऐसे में भर्ती को कम किया जायेगा. क्योंकि अब सेना के बहुत से ऐसे अंग हैं जो जरूरी नहीं रह गए हैं फिर भी वे सेना में है इसलिए सेना को पुर्नगठन करने की जरूरत है.

हाल ही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी कहा था कि सेनाओं को टेक्नोलोजी और ज्वाइंटनेस का ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल करना चाहिए ताकि सेना को ‘लीन एंड थिन’ बनाया जाए.

लेकिन सेना के सूत्रों की मानें तो ये ‘टीथ एंड टेल’ की कहानी है यानि सेना उन्हीं अंगों को कम करेगी जो टेल का काम करते थे जैसा कि आर्मी-फार्म्स या फिर सेवादारी सिस्टम.

सीधे युद्ध से जुड़े सैनिकों में नहीं होगी कमी:

सेना के वो विंग जो सीधे युद्ध से जुड़े हुए हैं उन्हें कम नहीं किया जायेगा. इनमें से कुछ रिपोर्ट्स को तो सीधे सेना लागू कर सकती है. लेकिन कुछ के लिए सेना को सरकार (यानि रक्षा मंत्रालय) से मंजूरी लेनी होगी.

क्योंकि उससे वायुसेना और नौसेना पर भी असर पड़ सकता है. जैसाकि सेना ब्रिगेडयर रैंक को खत्म करना चाहती है और कर्नल रैंक के अधिकारी को सीधे मेजर-जनरल के लिए पदोन्नति पर विचार चल रहा है.

लेकिन ऐसा करने पर वायुसेना और नौसेना के सम कक्ष अधिकारियों की रैंक का क्या होगा, उसके लिए आखिरी निर्णय रक्षा मंत्रालय ही लेगा.

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