Category : व्यंग्य

हास्य-व्यंग्य (vyangya) की शिखर कविताएँ हिन्दी में हास्य-व्यंग्य कविताओं का उदय मुख्यतः स्वतंत्रता के बाद हुआ।

व्यंग्यात्मक कविता, हास्य व्यंग्य कविता

व्यंग्य

व्यंग: पीट गये दारोग़ा !

Krishnendra Rai
पीट गये दारोग़ा । धो रहे पार्षद ।। क़ानून के रखवाले । होटल में रसद ? बेहतरीन विडियो । खोल रहा पोल ।। रंजिश या
व्यंग्य

हादसा ये अमृतसर !

Krishnendra Rai
त्राहिमाम-त्राहिमाम । सस्ती हुई जान ।। घोर लापरवाही । हर लिए प्राण ।। असह्य अब पीड़ा । हादसा ये अमृतसर ।। जो भी ज़िम्मेदार ।
व्यंग्य

कविता: अमृतसर रेल हादसा

Shivani Awasthi
रेल हादसे ने किया भारी नर संहार। अमृतसर में हो गया रक्त रंजित त्यौहार। रक्त रंजित त्यौहार दशहरा मना न अच्छा। गईं दर्जनों जान, मरे
व्यंग्य

व्यंग: एफ़आईआर यात्रा !

Krishnendra Rai
दर्ज एफ़आइआर । पर हुआ विलंब ।। अमर और आज़म । छिड़ गयी जंग ।। जान की धमकी । धार्मिक उन्माद ।। एफ़आइआर यात्रा ।
व्यंग्य

व्यंग: नैतिकता लाचार!

Krishnendra Rai
टूट रहे विधायक । जुट रही सरकार ।। जनसेवा हावी । नैतिकता लाचार ।। राजनीतिक अखाड़ा । पटखनी पर ज़ोर ।। हो जाना क़ाबिज़ ।
व्यंग्य

व्यंग: मी टू चल पड़ा !

Krishnendra Rai
मी टू चल पड़ा । उखाड़ो गड़ा मुर्दा ।। करना साफ धूल । धो डालो पर्दा ।। आरोप-मानहानि । बदस्तूर जारी ।। हिल जायेगी कुर्सी