हरियाणा के सिर बदनामी के और कितने ताज?

 July 13, 2017 3:44 pm
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वैदिक और सिंधु घाटी सभ्यता का मुख्य निवास, विभिन्न निर्णायक लड़ाइयाँ, महाभारत का युद्ध, गीता का उपदेश, सैनिकों की खान, खाद्यान और दुग्ध उत्पादन में देश का प्रमुख राज्य, कृषि प्रधान प्रदेश, भारत में सबसे अधिक ग्रामीण करोड़पतियों की धरा, खेलों में प्रदेश के छोरों के साथ छोरियों(women security) के उत्कृष्ट प्रदर्शन के अलावा यहां के बाशिंदों ने न जाने कितनी और उपलब्धियां हासिल कर हरियाणा प्रदेश को देश-विदेश में पहचान दिलाई है।

लेकिन बात जैसे ही प्रदेश की लड़कियों और महिलाओं(women security) के साथ आए दिन हो रहे अत्याचार, दुराचार और कन्या भ्रूण को माँ की कोख में ही मार देने की घिनौनी कार्रवाई हो रही है वह प्रदेश को शर्मशार कर देती है। जिस पर सिर्फ सरकार, प्रशासन और समाज ज्ञान और उपदेश ही दे रहा है, बांट रहा है। इस बारे में व्यापक स्तर पर जो काम होना चाहिए और जिसकी दरकार सबसे अधिक है बेटियों को, महिलाओं को, न सिर्फ बचाने की बल्कि उन्हें बचाकर इन्सान के रूप में मानकर उन्हें शिक्षित करते हुए आगे बढ़ाने की। उस बारे में अब काम करना इन तीनों सरकार, प्रशासन, समाज की प्राथमिकता में सबसे ऊपर होना चाहिए। इसके इतर यह अच्छी बात हो रही है कि युवा पीढ़ी इसे गंभीरता से समझते हुए पुरानी परम्परा, मान्यता और सोच को तिलांजली देते हुए लड़के-लड़कियों के रूप में हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है। इस बीच ऐसा बिल्कुल नहीं है कि, बीते दशकों में हरियाणा ने प्रगति नहीं की। हरियाणवियों ने बीते वर्षों में आर्थिक प्रगति के साथ-साथ शिक्षा और खेल के क्षेत्र में भी जबरदस्त तरक्की कर नित नए मुकाम हासिल किए। लेकिन हमारी आर्थिक प्रगति और बढ़ते शिक्षा के स्तर का भी इस समस्या पर कोई खास प्रभाव देखने को नहीं मिला। हमारे समाज के हर गली, नुक्कड़ और बाज़ार में लिंग परिक्षण के खुले निजी क्लीनिक तो जैसे कन्या भ्रूण के लिए कसाई घर बन गए। समय-समय पर बनी विभिन्न दलों की सरकारों और अनेक सामाजिक संगठनों ने इस बुराई को खत्म करने और समाज में जागरूकता फैलाने के लिए काफी प्रयास भी किया लेकिन उनके प्रयास हरियाणवियों के अड़ियल रवैये के आगे दम तोड़ते नज़र आए और 2011 की जनगणना के मुताबिक प्रदेश में लिंगानुपात दर 1000 लड़कों के मुकाबले 879 लड़कियों पर ही सिमटकर रह गई।

वर्ष 2014 के आम चुनाव में देश के लोगों ने लगभग एकमत होकर नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली भारतीय जनता पार्टी को सत्ता सौंपी। लोकसभा चुनावों के चंद महीनों बाद हुए प्रदेश चुनाव में भी हरियाणा की जनता ने भाजपा में भरोसा व्यक्त कर प्रदेश में पहली बार भाजपा की पूर्ण बहुमत की सरकार बनने का रास्ता साफ़ किया और मनोहर लाल के रूप में हरियाणा प्रदेश को पहला भाजपाई मुख्यमंत्री मिला। प्रदेश में पहली बार मनोहर लाल के नेतृत्व में भाजपा के पूर्ण बहुमत से सत्ता पर काबिज होने से लोगों में नवाचार की भावना का संचार हुआ और वर्षों से बदनामी का दंश झेल रहे प्रदेशवासियों के चूर हो चुके सपने एक बार फिर जीवंत हो उठे।

नरेन्द्र मोदी के प्रधानमंत्री की कुर्सी पर पदासीन होने के कुछ महीनों बाद ही उन्होंने हरियाणा एवं देश के अन्य प्रदेशों में गिरती लिंगानुपात(women security) दर को भांप कर ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ योजना शुरू करने की कवायद शुरू की और 22 जनवरी 2015 को हरियाणा के पानीपत से प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने ‘बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ’ जैसी महत्वपूर्ण राष्ट्रव्यापी योजना की घोषणा की । लिंगानुपात में सुधार के लिए केंद्र सरकार ने एक के बाद एक सुकन्या समृद्धि जैसी कई महत्वकांक्षी योजनाओं को लागू कर देश एवं प्रदेशवासियों को बेटी होने और बेटे-बेटी के लालन-पोषण में होने वाले भेदभाव को खत्म करने के लिए प्रेरित किया। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के इस राष्ट्रव्यापी अभियान के बाद मनोहर लाल के नेतृत्व वाली प्रदेश सरकार भी हरकत में आई और हरियाणा में महिलाओं और बेटियों की शिक्षा, सुरक्षा के लिए प्रत्येक जिले में महिला पुलिस थानों की स्थापना, प्रत्येक जिले में महिला महाविद्यालय खोलने, बालिकाओं के लिए मुफ्त बस सेवा आदि घोषणाओं से प्रदेश की धूमिल छवि को सुधारने का प्रयास किया। बेटियों को बचाने की मुहिम में प्रदेश के आम लोगों, सामाजिक संगठनों के अलावा जींद जिले के बीबीपुर गाँव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान का ‘सेल्फी विद डॉटर’ अभियान की देश के महामहिम राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने न सिर्फ सराहना की बल्कि अपनी डॉटर शर्मिष्ठा मुखर्जी के साथ अपनी एक सेल्फी भी ‘सेल्फी विद डॉटर’ पोर्टल पर पोस्ट की । जिसे प्रदेश के अलावा राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर काफी सराहा गया । माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी बीबीपुर गांव के पूर्व सरपंच सुनील जागलान के ‘सेल्फी विद डॉटर’ कैंपेन का जिक्र अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम में कर उनकी काफी प्रशंसा की। लोगों के बढ़ते आत्मविश्वास से असमान लिंगानुपात की चिंता से घिरे हरियाणा प्रदेश में एकाएक बेटियों की जन्म दर बढ़ने लगी और 2016 के दौरान 900 या 900 से अधिक का लिंगानुपात दर्ज किया गया, जिससे भ्रूण हत्या का धब्बा हरियाणा से धुलने लगा।

लेकिन बीते लगभग तीन वर्ष में कई मौके ऐसे आए जब मुख्यमंत्री मनोहर लाल के नेतृत्व वाली हरियाणा भाजपा सरकार महिलाओं/बेटियों को लेकर काफी असंवेदनशील(women security) नज़र आई । जाट आरक्षण आन्दोलन के दौरान मुरथल ढाबे पर महिलाओं से रेप की घटना को लेकर सरकार की लम्बे समय तक चुप्पी, धर्मनगरी कुरुक्षेत्र में हरियाणा पुलिस द्वारा घर में घुसकर महिलाओं के साथ मारपीट और अभद्र व्यवहार करना और लगभग 15 दिन बाद मामले के वीडियो को सोशल मीडिया पर वायरल होता देख सरकार एवं प्रशासन की नींद खुलना, सोनीपत में निर्भया जैसे काण्ड की पुनरावृत्ति का होना और पीड़ित परिवार का एफ़आईआर के लिए दर-दर भटकना आदि मुद्दे प्रमुख रहे । इसी वर्ष मई माह की चिलचिलाती धूप में पढ़ने जाते समय आए दिन मनचलों की फब्तियां सुन-सुन कर हार चुकी बालिकाओं का रेवाड़ी के गोठड़ा गाँव में स्कूल को अपग्रेड कराने के लिए महीने भर के संघर्ष ने देश-विदेश की मुख्यधारा की मीडिया में जगह बनाई । बावजूद इसके प्रशासन और सरकार पूरे मामले की जानकारी होते हुए भी लगभग महीने भर तक मूकदर्शक बनी रही । सरकार की भद्द पिटती देख शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने आनन-फानन में स्कूल अपग्रेड किए जाने की जानकारी अपने फेसबुक अकाउंट के माध्यम से साझा की । लेकिन महीने भर की भूख, प्यास और चिलचिलाती धूप से बच्चियों का आत्मविश्वास इतना गिर चुका था कि उन्होंने सरकार की घोषणा पर भरोसा ना होने की बात कहकर अपना संघर्ष जारी रखा और शिक्षा विभाग द्वारा आदेश जारी होने बाद ही अपना अनशन खत्म किया।

लेकिन मामला यहीं नहीं थमा । इसके बाद भी मनोहर लाल के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार महिलाओं/बेटियों को लेकर कई मौकों पर असंवेदनशीलता की पराकाष्ठा को लांघती नज़र आई । पिछले ही महीने प्रदेश सरकार के कामकाज और जनकल्याणकारी योजनाओं की जानकारी को जन-जन तक पहुँचाने के लिए छापी जाने वाली मासिक पत्रिका ‘हरियाणा संवाद’ के मुख्य पृष्ठ पर घूँघट की आन-बान, म्हारे हरियाणा की पहचान’ घूँघट में एक घरेलू महिला के चित्र सहित छापकर सरकार एक बार फिर देश-विदेश के मीडिया की सुर्ख़ियों में रही और अपनी भद्द पिटवाती नज़र आई। मामला अभी शांत हुआ भी नहीं था कि अगले ही दिन डीलक्स कंडोम का नाम आशा रखने और उनके वितरण के लिए आशा वर्करों की ड्यूटी लगाये जाने पर सरकार को आशा वर्करों के गुस्से का सामना करना पड़ा और एक बार पुन: मनोहर सरकार महिलाओं को लेकर असंवेदनशील दिखाई दी। इसके अलावा भी ऐसे सैकड़ों मौके आए जिन पर हरियाणावासियों की छवि महिला विरोधी या महिला उत्पीड़न को बढ़ावा देने वालों की बनी।

ऐसे में सरकार के स्तर पर महिलाओं के प्रति बरती गई असंवेदनशीलता के प्रति हम मुंह फेरते हुए चुप होकर बैठ जाएं या फिर खुद के संवेदनशील होने का परिचय देते हुए समाज में इसके प्रति व्यापक स्तर पर और नए सिरे से चेतना फैलाने का काम करें । हमको यह बात मान लेनी होगी कि सामाजिक समस्याओं को खत्म कर आगे बढ़ने का काम समाज का ही है और हम है कि इसके समाधान की मांग सरकार से कर रहे हैं । ऐसे में जब समाज अपने स्तर पर इस काम को हाथ में लेते हुए आगे बढ़ेगा तब सरकार भी अपने कदम समाज के साथ आगे बढ़ाएगी । बहुत स्पष्ट है कि सरकार में बैठे लोग समाज से ही गए हुए लोग है । हम बच्चियों की, महिलाओं की एक इन्सान के रूप में चिंता करें । उन्हें बचाएं, उनकी सुरक्षा सुनिश्चित करें, उन्हें आगे बढ़ाएं । क्योंकि कोई भी देश, समाज, प्रदेश देश की आधी आबादी(महिलाएं) को साथ लिए बिना आगे नहीं बढ़ सकता। यह बात हमें समझनी होगी।

लेखक: सतीश यादव

Divyang Dixit

About Divyang Dixit

Journalist, Listener, Mother nature's son, progressive rock lover, Pedestrian, Proud Vegan, व्यंग्यकार
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