विधानसभा पर वार की साजिश: सबक सिखाने का नहीं सीखने का वक्त है!

विधानसभा पर वार की साजिश: सबक सिखाने का नहीं सीखने का वक्त है!

सुबह का वक्त 10 बजने ही वाले थे.बजट सत्र का चौथा दिन था औऱ बजट पर बहस लगातार जारी है. लिहाजा सत्ता पक्ष औऱ विपक्ष दोनों ही पूरी तैयारी के साथ उत्तर प्रदेश की विधानसभा (up assembly) पहुँच रहे थे. सुरक्षा के नाम पर विधानसभा के हर गेट पर तैनात सुरक्षाकर्मी मंत्रियों,विधायको और उनके समर्थको को सलाम ठोक रहे थे. सब कुछ सहज था क्योंकि विधानसभा के माननीयों को नहीं पता था कि 12 जुलाई की सुबह वह बारुद के किस मुहाने पर बैठे थे.लेकिन अचानक एक खबर विधानसभा के भीतर से बाहर आई तो सदन के भीतर बाहे चढ़ाने वालों के चेहरे उदास हो गये.खबर ऐसी कि जिसने यूपी के सीएम और सख्त छवि के नेता योगी आदित्यनाथ को सोचने पर मजबूर कर दिया.

यूपी की सियासत में भूचाल :

दरअसल उत्तर प्रदेश के इतिहास में यह पहली घटना थी कि विधानसभा के मुख्य मंडप के भीतर शक्तिशाली विस्फोटक बरामद हुआ था.आईये अब आपको दो दिन पीछे यानि 12 जुलाई 2017 की सुबह विधानसभा लेकर चलते है.सुबह का वक्त था. 11 जुलाई को पेश हुये बजट पर चर्चा होने वाली थी कि अचानक समाजवादी पार्टी के विधायक औऱ पूर्व मंत्री रामगोविंद चौधरी की सीट के नीचे सफेद पाउडर बरामद हुआ.यह पाउडर एक पालीथिन में था. मामला विधानसभा के सदन का था लिहाजा उस पाउडर को जांच के लिये भेजा गया लेकिन इन दो दिनों के दौरान न किसी विधायक और न ही किसी मंत्री ने यह सोचा कि यह पाउडर क्या हो सकता है. सुरक्षा मे लगे कर्मचारियों औऱ मार्शल ने भी नहीं सोचा लेकिन जब फारेसिक रिपोर्ट आई तो होश उड गये. 150 ग्राम की मात्रा में बरामद हुआ यह पाउडर दरअसल पीईटीएन ( PETN ) था.

क्या होता है PETN: 

आखिर क्या होता है पीईटीएन? कई मंत्रियों औऱ विधायकों को नहीं पता था लेकिन जब पता चला तो चेहरो पर खौफ उतर आया. पीईटीएन जिसे पेंटाइरिथ्रीटोल टेट्रानाइट्रेट कहा जाता है यह एक बहुत ही शक्तिशाली विस्फोटक होता है. पहली बार इसका इस्तेमाल साल 2011 में दिल्ली हाईकोर्ट के बम धमाकों में किया गया था. पीईटीएन प्लास्टिक विस्फोटक होता है और यह गंधहीन होता है. इसलिए इसे पकड़ने में काफी मुश्किल आती हैं. स्निफर डॉग और मेटल डिटेक्टर भी इसका पता नहीं लगा सकते है. खास बात यह है कि यह कोई मेटल नहीं होता इसलिए एक्स-रे मशीन भी इसे नहीं पकड़ पाती. यह एक तरह का रासायनिक पदार्थ होता है. बहुत कम मात्रा में होने पर भी पीईटीएन से शक्तिशाली धमाका हो सकता है. ऐसे हालात में विधानसभा तक पीईटीएन पहुंचना बहुत खतरनाक संकेत है. खुद मुख्यमत्री योगी आदित्यनाथ ने माना कि 500 ग्राम पीईटीएन ने पूरी विधानसभा उड़ाई सकती है ऐसे में 150 ग्राम विस्फोटक 403 विधायकों वाले सदन को उड़ाने लिये पर्याप्त था.

विधानसभा के मुख्य मंडप तक पहुँचा कैसे:

  • सवाल यह था कि विधानसभा की भारी भरकम सुरक्षा के बीच पीईटीएन जैसा विस्फोटक विधानसभा और फिर मुख्य मंडप तक पहुंचा कैसे?
  • सुबह 10 बजे यह खबर मिलते ही सीएम योगी खुद सक्रिय हो गये.
  • सीएम ने आनन-फानन में विधानसभा के भीतर हाईप्रोफाईल बैठक बुलाई.
  • इस मीटिंग में विधानसभा की सुरक्षा से जुड़े अधिकारियों के अलावा पुलिस और गृह विभाग के आला अफसर भी मौजूद थे.
  • आधे घंटे तक चली मीटिंग में सुरक्षा को लेकर हुई इस भारी चूक पर चर्चा तो हुई, साथ ही सीएम ने सुरक्षा के नये मापदंड अपनाये जाने के निर्देश भी जारी किये.
  • इसकी जानकारी उन्होंने खुद सदन को अपने भाषण मे दी.
  • इसमें शक नहीं है कि खुद सीएम योगी आदित्यनाथ हमेशा से आतंकियो औऱ कट्टरपंथियो के निशाने पर रहे हैं.
  • योगी आदित्यनाथ की छवि एक हिंदूवादी नेता की रही है.
  • मुख्यमंत्री बनने से पहले भी उनके बयान पर विवाद होता रहा है क्योंकि वह खास मजहब को हमेशा निशाने पर लेते रहे हैं, खासतौर से आतंकवाद औऱ साप्रदायिक दंगो के मुद्दो पर.
  • उनके मुख्यमंत्री बनने के बाद उनकी खुद की सुरक्षा को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं क्योंकि योगी का मुख्यमंत्री बनना मुस्लिम कट्टरपंथियो औऱ आतंकियो को कतई नागवार गुजर रहा है.
  • यही वजह है कि योगी जहां जाते हैं वहां सुरक्षा की पूरी व्यवस्था होती है.
  • अभी पिछले महीने योगी का बिहार दौरा हुआ था, तो दरभंगा की रैली के दौरान योगी आदित्यनाथ ने बुलेट प्रूफ शीशे के पीछे से ही लोगों को संबोधित किया था.

सोची समझी आतंकी रणनीति का हिस्सा

  • इसमें शक नहीं कि विधानसभा के भीतर पीईटीएन जैसे खतरनाक विस्फोटक का बरामद होना कोई शरारत नही हो सकती है.
  • यह एक सोची समझी आतंकी रणनीति का हिस्सा ही है.
  • पहले विस्फोटक औऱ फिर डेटोनेटर लाने की प्लानिंग हो सकती है.
  • अगर ऐसा हो जाता तो महज कल्पना करके ही रोंगटे खड़े हो जाते हैं.
  • फिलहाल छानबीन में डेटोनेटर या रिमोट जैसी चीज बरामद नहीं हुई है, लेकिन सीएम योगी ने सख्त रुख अपनाते हुये इस घटना की जांच एनआईए से करवाने की तत्काल सिफारिश कर दी.
  • नतीजा यह हुआ है कि शाम तक एनआईए की टीम ने विधानसभा के भीतर जांच शुरु कर दी.समझना यह होगा कि आखिर यूपी, योगी औऱ आतंक का कनेक्शन क्या है.
  • योगी आदित्यनाथ को आतंकियो औऱ कट्टरपंथियो से खतरा है.
  • उत्तर प्रदेश आतंकियो के स्लीपींग माड्यूल्स के लिये बदनाम रहा है.
  • देश में होने वाली हर आतंकी वारदात का कोई न कोई यूपी कनेक्शन निकलता है.
  • ऐसे में यह घटना आतकी वारदात के प्रयास का पुख्ता सबूत लगती है.

..तो फिर दर्ज हो जाता इतिहास के पन्नों में वो काला दिन 

विधानसभा के भीतर औऱ बाहर मीडिया, नेता, मंत्रियों, कर्मचारियो के बीच लगातार यह चर्चा हो रही है कि अगर आतकी अपने मंसूबो में कामयाब हो जाते तो अपनी शिल्पकारी के लिये दुनिया भर में मशहूर यूपी का विधानसभा इतिहास के पन्नों में सिमट जाता. बहुत कम लोग विधानसभा की शिल्पकारी औऱ वास्तुकला के बारे में जानते हैं. विधानभवन जिसे काउंसिल भवन की नींव 15 दिसंबर 1922 को अंग्रेज गवर्नर सर स्पेंसर हरकोर्ट ने रखी थी औऱ 21 फरवरी 1928 को इसका उदघाटन किया गया था. इस भवन को कोलकाता की कंपनी मेसर्स मार्टिन एंड कंपनी ने बनाया था और इसका पूरा आर्किटेक्ट सर स्विनोन जैकब और हीरा सिंह ने तैयार किया था.विधानसभा का भवन अर्धचक्राकार है और यह यूरोपीयन तथा अवधी शैली के मिश्रण का उत्कृष्ट नमूना है. इसके बीच में गोथिक शैली का गुंबद औऱ रोमन कलाकृति की मूर्ति स्थापित है. संगमरमर की सीढियाँ उस दौर में ताजमहल से प्रेरित होकर बनवाई गई थी. वास्तुकला पच्चीकारी शैली की है औऱ नृत्य करते आठ मोर शुभता का प्रतीक है.

जरा सी लापरवाही बनी जी का जंजाल:

यह सबकुछ नष्ट हो सकता था विधानसभा की सुरक्षा की जरा से लापरवाही से.विधानसभा में विस्फोटक की बरामदगी से यूपी की सुरक्षा एजेंसियों पर क्या प्रभाव डाला यह तो नहीं कहा जा सकता है लेकिन पूरा देश एलर्ट हो गया. सूचना मिलने के साथ ही दूसरे राज्यों की विधानसभाओं औऱ देश की संसद मे सुरक्षाकर्मी मुस्तैद हो गये. देश की संसद मे भी सघन चेकिंग अभियान चलाया गया. आज भी देश वह दिन नहीं भूला है जिस दिन हमारे देश की पूरी लोकतांत्रिक व्यवस्था खतरे मे पड गई थी. 13 दिसंबर 2001 का वह दिन देश के काले दिन के तौर पर दर्ज हुआ जब चंद हथियारबंद आतंकियों ने हमारे देश को कुछ घंटो के लिये बंधक बना लिया था. हाथों मे एके 47 लिये पांच आतकियो ने गोलियों से संसद का सीना छलनी करने की कोशिश की थी. ताबड़तोड़ फायरिंग करते हुये आतंकी उस रास्ते तक गये जहाँ से होकर हमारे प्रधानमत्री की गाड़ियाँ गुजरती हैं. लेकिन सुरक्षाबलों ने अपनी जान गंवाकर देश की संसद की रक्षा की लेकिन जो नुकसान औऱ बदनामी हुई उसकी भरपाई कौन कर सकता है. सेना की वर्दी मे आये आतंकी कार से बाहर निकल विस्फोटक के तार जोडने लगे थे.इरादा देश की संसद को उड़ा देने का था लेकिन सलाम है देश के जवानों को जिन्होने जान गंवाकर देश के सम्मान औऱ संसद दोनो की रक्षा की. मीडिया के कैमरों ने वह भयावह मंजर कैद किया जिसे देश औऱ दुनिया ने देखा लेकिन हमारे देश ने क्या सबक लिया.

क्या सबक सीखेंगे हम:

उत्तर प्रदेश की विधानसभा में कोई भी अखबार या चैनल का कर्मचारी चंद नोट थमा कर स्टिंग आपरेशन प्लान कर देता है कि कैसे बगैर किसी जांच औऱ पास के कोई भी विधानसभा के भीतर चला जाता है. हमारा सिस्टम इससे जागता नहीं है बल्कि मीडिया को कोस कर आगे निकल जाता है. अपनी नाकामी छिपाने के लिये इसे मीडिया का टीआरपी प्लान या अखबारों का सर्कुलेशन प्लान बताकर सिस्टम को गुमराह करता है. लेकिन अगर सुरक्षा मे चूक नहीं है तो सवाल यह है कि आखिर कैसे यह विस्फोटक उत्तर प्रदेश की विधानसभा तक पहुंचा जहाँ प्रदेश की आत्मा निवास करती है. Writer:Manas SrivastavaAssociate EditorBharat Samachar

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