हार के बावजूद इस टोटके के सहारे अखिलेश यादव ने बनाया ‘कीर्तिमान’!

हार के बावजूद इस टोटके के सहारे अखिलेश यादव ने बनाया ‘कीर्तिमान’!

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की बीते विधानसभा चुनाव में करारी हार का सामना करना पड़ा है, हार भी ऐसी वैसी नहीं है, 2012 में जहाँ 224 सीटें मिली थीं। 2017 में उनमें से मात्र 47 सीटें ही बचीं। जिसके बाद सपा समेत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव की बड़ी ही फजीहत हुई थी। लेकिन घने अँधेरे में ही रौशनी की किरण साफ़ देखी जा सकती है। हार के बावजूद अखिलेश यादव ने एक कीर्तिमान अपने नाम किया है, जिसे तोड़ना आसान नहीं होगा।

4 वीडी में जश्न का माहौल:

माना कि, बीते यूपी विधानसभा चुनाव में अखिलेश यादव अपनी पार्टी के कर्ता-धर्ता बनकर भी साइकिल के रिम में जितनी तीलियाँ होती हैं, उतने भी कुल विधायक जमा नहीं कर पाए। लेकिन इसके बावजूद सपा कार्यालय और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के आवास 4 वीडी पर जश्न का माहौल 11 मार्च से बराबर जारी है। वहीँ ‘ये जवानी है कुर्बान’ ब्रिगेड के कुछ जवानों ने बातचीत के दौरान बताया कि, पार्टी भले घुटनों के बल आकर हारी हो, लेकिन भैया ने फिर भी एक रिकॉर्ड बना दिया है, जो आज तक सूबे का अन्य कोई मुख्यमंत्री नहीं कर पाया है।

बुरी तरह हार के बाद भी अखिलेश ने बनाया रिकॉर्ड:

यूपी चुनाव में सपा की बहुत तगड़ी वाली हार हुई है, लेकिन इस हार के बावजूद अखिलेश यादव ने एक नया कीर्तिमान बनाया है। अखिलेश यादव देश और सूबे के पहले ऐसे मुख्यमंत्री बन गए हैं, जो बिना नोएडा एक बार भी जाए हार गए। इसके साथ ही अखिलेश यादव ने सूबे के उस मिथक को तोड़ दिया है, जिसमें मुख्यमंत्री अपनी हार का ठीकरा नोएडा के सर पर फोड़ते थे।

बिना काम बोले ये मुमकिन नहीं था:

सूत्रों के अनुसार, सपा राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव अपना यह कीर्तिमान ‘काम बोलता है’ कैंपेन को समर्पित करते हैं। उनका मानना है कि, यदि काम इतना नहीं बोलता तो ये होना मुमकिन नहीं था। काम बोलता है के अलावा अखिलेश यादव पार्टी कार्यकर्ताओं को भी इस कीर्तिमान में हिस्सेदार बताते हैं। उनका कहना है कि, पार्टी कार्यकर्ताओं ने पूरे 5 साल इतनी लगन से जमीनों पर कब्ज़ा किया कि, उन्हें हारने के लिए नोएडा जाने की जरुरत ही नहीं पड़ी।

व्यंग्य!

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