आंगनबाड़ी वर्कर्स की वर्तमान सरकारों से गुहार!

 June 10, 2017 5:12 pm
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आंगनबाड़ी की चेकिंग तो ऐसे कर रही है यूपी सरकार जैसे 4,000/-रूपये की नौकरी कर के आंगनबाड़ी वर्कर कोई गुनाह कर रही हो. इन चेकिंग से ज्यादा इनके घर के चूल्हों की, बच्चों की फीस की, रसोई के सिलेंडर की, बिजली पानी के बिलों की, राशन की ओर देखें तो ज्यादा बेहतर होगा, कि इतनी मामूली तनख्वाह में कैसे गुजारा होता है क्यूं न सरकारों की चेकिंग हो कि इतनी कम तनख्वाह क्यूँ दी जा रही है.

बंधुआ मजदूर से भी कम तनख्वाह:

  • देश में बन्धुआ मजदूर की तनख्वाह 8400/-रूपये से अधिक निश्चित है
    पर आंगनबाड़ी वर्कर की 4,000/-.
  • चुनाव
  • मतगणना
  • टीकाकरण
  • खाना बांटना
  • सर्वे करना
  • गर्भवती महिलाओं की जानकारी
  • नवजात शिशु की जानकारी
  • बी एल ओ का कार्य
  • पेंशन कार्य
  • आधार कार्ड
  • राशन कार्ड
  • पहचान पत्र
  • रिपोर्ट पर रिपोर्ट आदि आदि!

पर न प्रधानमंत्री जी (जो कहते है महिलाओं का सम्मान, सबका साथ सबका विकास) का ध्यान दुखी आंगनबाड़ी वर्कर्स की ओर जाता है, न महिला विकास कल्याण विभाग का न मुख्यमंत्री जी का.

कैसे हो गुजारा?:

हम पूछते है कि पहले 3200 रूपये फिर 4000/-रूपये मात्र तनख्वाह मे़ कैसे गुजारा होता है, सरकारी आफिस में किसी की इतनी तनख्वाह है क्या. फिर हम कैसे कह सकते हैं कि मेरा देश आगे बढ़ रहा है. हम कैसे कह सकते है कि महिलाओं को सम्मान
मिल रहा है, कोई प्रधानमंत्री जी, मुख्यमंत्री जी से पूछे.

रोज-रोज सुप्रीम कोर्ट भी किसी न किसी मामले में अपनी स्टेटमेंट देती है पर उन्हें भी कभी आंगनबाड़ी वर्कर महिलाओं का ध्यान नही आया. कितनी वर्कर ऐसी हैं जिनका घर खर्च इसी तनख्वाह से चलता है पर तनख्वाह भी प्रति माह ठीक समय पर नही आती, कभी दो कभी तीन महीने पर इनके दर्द से कोई मतलब नहीं है. माननीय प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी आपसे निवेदन है कि, इन अबला नारियों पर दया करें, हो सके तो इनकी तनख्वाह में बढ़ोत्तरी करें, पेट की भूख बहुत बड़ी होती है.

नारी का सम्मान कहने से नही उनके लिये कुछ करने से होगा. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ आप भी अपना ध्यान केंद्रित कर आंगनबाड़ी वर्कर्स का कष्ट समझने
का कष्ट करें. बेसहारो को सहारा सरकार न देगी तो कौन देगा?

140/-रूपये प्रतिदिन आय (आंगनबाड़ी वर्कर)

70/-रूपये प्रतिदिन आय (आंगनबाड़ी हैल्पर )

क्या गुनाह है हमारा जो हमारे साथ यह अन्याय हो रहा है

न कोई एन. जी. ओ
न कोई महिला आयोग
न कोई सामाजिक संस्था
कोई नही हमारा साथ देने को
चुनाव के दिनो मे बडे बडे वादे
फिर भूली बिसरी यादें

आपसे प्रधानमंत्री एवं मुख्यमंत्री जी पुन: अनुरोध है, कि कृप्या आंगनबाड़ी वर्कर एवं हैल्पर की दयनीय स्थिति पर तरस खाये.

Divyang Dixit

About Divyang Dixit

Journalist, Listener, Mother nature's son, progressive rock lover, Pedestrian, Proud Vegan, व्यंग्यकार
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