चुगलखोरों के कारण पार्टी का बेड़ा गर्क हुआ- शिवपाल सिंह यादव

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के नेतृत्व को लेकर जो घमासान(SP feud) शुरू हुआ था वो यूपी चुनाव के बाद भी बदस्तूर जारी है। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद न छोड़ने के बाद से सपा में स्थिति और ख़राब हो चुकी है। वहीँ गुरुवार से पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव के बीच जुबानी जंग जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को शिवपाल सिंह यादव ने रामगोपाल यादव पर हमला बोला था, जिसके बाद शनिवार 3 जून को रामगोपाल यादव ने शिवपाल के आरोपों पर पलटवार किया था।

शिवपाल सिंह यादव का रामगोपाल यादव पर पलटवार(SP feud):

  • शनिवार की सुबह शिवपाल सिंह यादव पर रामगोपाल यादव ने पलटवार(SP feud) करते हुए आरोप लगाये थे।
  • जिसके बाद सपा नेता शिवपाल सिंह यादव ने रामगोपाल के आरोपों का जवाब दिया है।
  • इटावा में शिवपाल सिंह यादव ने मीडिया के सवालों पर कहा कि, चुगलखोरों के कारण पार्टी का बेडा गर्क हुआ है।
  • उन्होंने आगे कहा कि, सेक्युलर मोर्चा सपा को कमजोर नहीं होंगे देगा।

रामगोपाल के बयान(SP feud):

  • सपा अखिलेश के नेतृत्व में एकजुट है।
  • बयान देने वाले देते रहते हैं।
  • बयानों को कौन पूछता है।
  • गौरतलब है कि, शिवपाल यादव ने कल इटावा में रामगोपाल को चुगलखोर और चापलूस कहा था।

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सपा का आंतरिक घमासान: शिवपाल-रामगोपाल के बीच जुबानी जंग जारी!

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के नेतृत्व को लेकर जो घमासान(SP feud) शुरू हुआ था वो यूपी चुनाव के बाद भी बदस्तूर जारी है। अखिलेश यादव के राष्ट्रीय अध्यक्ष का पद न छोड़ने के बाद से सपा में स्थिति और ख़राब हो चुकी है। वहीँ गुरुवार से पार्टी के नेता शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव के बीच जुबानी जंग जारी है। इसी क्रम में शुक्रवार को शिवपाल सिंह यादव ने रामगोपाल यादव पर हमला बोला था, जिसके बाद शनिवार 3 जून को रामगोपाल यादव ने शिवपाल के आरोपों पर पलटवार किया है।

सपा का आंतरिक घमासान(SP feud):

  • सपा में यूपी विधानसभा चुनाव से पहले जो घमासान(SP feud) शुरू हुआ था वो बदस्तूर जारी है।
  • जिसके बाद सपा के दोनों गुटों के नेताओं में जुबानी जंग तेज हो गयी है।
  • इसी क्रम में शिवपाल सिंह यादव और रामगोपाल यादव के बीच जुबानी जंग जारी है।
  • शनिवार को रामगोपाल यादव ने कहा कि, सपा अखिलेश के नेतृत्व में एकजुट है।
  • शिवपाल पर हमला करते हुए उन्होंने कहा कि, बयान देने वाले देते रहते हैं।
  • इसी में उन्होंने आगे जोड़ा कि, बयानों को कौन पूछता है।
  • गौरतलब है कि, शिवपाल यादव ने कल इटावा में रामगोपाल को चुगलखोर और चापलूस कहा था।

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कांग्रेस की समीक्षा बैठक आज, गठबंधन पर भी फैसला संभव!

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में हार के बाद अब कांग्रेस ने समीक्षा करने का फैसला किया है. हार के कारणों पर समीक्षा के लिए आज लखनऊ स्थित पार्टी कार्यालय में बैठक बुलाई गई है. इस बैठक में प्रदेश अध्यक्ष राज बब्बर शामिल होंगे. इसके अलावा प्रदेश प्रभारी गुलाम नबी आजाद भी शामिल होंगे. कई जिलों के अध्यक्ष भी इस बैठक में हिस्सा लेंगे.

बैठक में सपा-कांग्रेस के भविष्य पर भी चर्चा:

  • इस बैठक में समाजवादी पार्टी के साथ गठबंधन और उसके भविष्य पर भी फैसला लिया जा सकता है.
  • आज कांग्रेस ने 12 मंडलों की समीक्षा बैठक बुलाई है.
  • प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर सुबह 11 बजे से बैठक होगी.
  • बैठक में यूपी विधानसभा चुनाव के हार के कारणों की समीक्षा की जाएगी.
  • इस बैठक में सपा के साथ गठबंधन को आगे जारी रखने या न रखने पर भी फैसला हो सकता है.
  • सूत्रों के अनुसार, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस का गठबंधन अब टूट की कगार पर पहुँच चुका है.
  • कांग्रेस पार्टी ने समीक्षा बैठक बाद आम सहमति बनायी है कि, गठबंधन में नहीं जाना चाहिए.
  • हालाँकि, गठबंधन पर आखिरी फैसला दोनों पार्टियों का राष्ट्रीय स्तर करेगा.
  • अब देखना होगा कि आज होने वाली बैठक के बाद क्या कुछ निकलकर सामने आता है.

यूपी चुनाव में हार की समीक्षा पर सपा में बैठक ले रहे हैं अखिलेश यादव!

उत्तर प्रदेश की समाजवादी पार्टी की विधानसभा चुनाव में करारी हार के बाद से पार्टी में लगातार हार पर मंथन जारी है, जिसके तहत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार 6 अप्रैल को पार्टी में समीक्षा बैठक बुलाई थी। अखिलेश यादव की अध्यक्षता में बैठक शुरू हो चुकी है।

अखिलेश यादव पहुंचे पार्टी कार्यालय, बैठक शुरू:

  • उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा था।
  • जिसके बाद से ही पार्टी में लगातार विधानसभा चुनाव में हुई हार पर मंथन जारी है।
  • इसी क्रम में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने गुरुवार को समीक्षा बैठक बुलाई है।
  • बैठक की अध्यक्षता करने के लिए अखिलेश यादव पार्टी कार्यालय पहुँच चुके हैं।
  • गौरतलब है कि, अखिलेश यादव ने चुनाव में हार के बाद हार के कारणों की समीक्षा की बात कही थी।

बैठक में शामिल होने वाले समाजवादी नेता:

  • बलराम यादव,
  • अहमद हसन,
  • मधु गुप्ता,
  • कमाल अख्तर,
  • जावेद आब्दी,
  • संजय लाठर,
  • राजपाल कश्यप,
  • अरविंद कुमार सिंह,
  • उषा वर्मा, जूही सिंह,
  • अभिषेक मिश्र,
  • राम आसरे विश्वकर्मा,
  • जगदेव सिंह
  • समाजवादी युवजन सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष विकास यादव,
  • लोहिया वाहनी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राकेश पल,
  • मुलायम सिंह यूथ ब्रिगेड के राष्ट्रीय अध्यक्ष गौरव दुबे,
  • समाजवादी छात्र सभा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल सिंह बैठक में शामिल हुए हैं।

आजम को अखिलेश ने दिया झटका, सौंपी इस ‘नेता’ को बड़ी जिम्मेदारी!

समाजवादी पार्टी की चुनाव में बड़ी हार के बाद भी सबकुछ ठीक होता नही दिखाई दे रहा है. चुनाव पूर्व अखिलेश यादव के करीबी समझे जाने वाले आजम खान को बड़ा झटका देते हुए अखिलेश यादव ने एक बड़ी जिम्मेदारी अपने इस ‘नये करीबी’ को सौंपने का फैसला कर लिया, इस फैसले के बाद अब फिर से सपा में दरार को लेकर सुगबुगाहट दिखाई दे रही है.

अखिलेश के इस फैसले से लगा आजम को बड़ा झटका:

  • समाजवादी पार्टी के विधायकों ने दोनों सदनों के नेता के चुनाव की जिम्मेदारी अखिलेश यादव को दी थी।
  • अखिलेश यादव ने अब दोनों सदनों में सपा का नेतृत्व करने वाले नेता का चुनाव कर लिया है।
  • बलिया के बांसडीह से विधायक रामगोविंद चौधरी को विधानसभा में नेता विपक्ष बनाया गया है।
  • पूर्व बेसिक शिक्षा मंत्री अहमद हसन को विधानपरिषद में नेता विपक्ष बनाये जाने की चर्चाएँ थी।
  • मगर उन्हें गलत साबित करते हुए विधानपरिषद में अखिलेश यादव खुद नेता विपक्ष चुने गए है।
  • नेता प्रतिपक्ष के रूप में आजम खान का नाम सबसे आगे था.
  • ऐसे में सवाल ये उठता है कि क्या आजम पद लेना नहीं चाहते थे या अखिलेश को आजम खान पसंद नहीं थे.
  • शिवपाल यादव और मुलायम सिंह यादव का ना आना भी अपने आप में सवाल उठाता है कि यादव परिवार में अभी सब ठीक नहीं चल रहा है.

स्वास्थ्य मंत्री से आज मिलेगा स्लाटर हाउस डेलीगेशन!

उत्तर प्रदेश में योगी आदित्यनाथ की सरकार आते ही अवैध बूचड़खानों को लेकर बेहद कड़े कदम उठाए गए। बीजेपी ने यूपी चुनाव से पूर्व सरकार बनने पर अवैध बूचड़खानों को बंद कराने का दावा किया था। योगी आदित्यनाथ के शपथ ग्रहण करने के बाद चंद दिनों में अवैध बूचड़खानों (अवैध स्लाटर हाउस) पर कार्रवाई शुरू हो गई।

स्लाटर हाउस डेलीगेशन की स्वास्थ्य मंत्री से गुहार

  • पिछले कुछ दिनों में प्रदेश भर में अवैध बूचड़खानों पर कार्रवाई की गई।
  • इसी क्रम में मंगलवार को स्लाटर हाउस डेलीगेशन स्वास्थ्य मंत्री से मुलाकात करेगा।
  • यह डेलीगेशन स्वास्थ्य मंत्री सिदार्थनाथ सिंह से सचिवालय में मिलने पहुंचेगा।
  • अब तक की कार्रवाई में पुलिस व प्रशासन ने कई अवैध बूचड़खानों पर ताला जड़ दिया है।
  • वहीं इसके अतिरिक्त तय मानकों पर काम नहीं कर रहें, बूचड़खानों पर भी कार्रवाई हुई।

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  • जिसका असर यह रहा कि प्रदेश भर में लगभग सभी बूचड़खानें बंद होने की कारागर पर खड़े हैं।
  • वहीं मीट कारोबारियों पर भी मानक के आधार पर दुकान न रखने या खुले में मीट काटने पर कार्रवाई हुई।
  • इसके चलते प्रदेश में स्लाटर हाउस और मीट कारोबार को करोड़ोें रूप का झटका लगा है।

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उत्तर प्रदेश में होगा अब ‘योगी राज’!

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बीजेपी विधायक दल की बैठक के बाद सीएम के नाम पर मुहर लग गई है. औपचारिक घोषणा आज अभी बाकी है आज होने वाली बैठक में सीएम के नाम की घोषणा की गई.

ये लेंगे सीएम पद की शपथ:

बारहवीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद योगी आदित्यनाथ उर्फ ‘अजय सिंह’ को उत्तर प्रदेश का सिंहासन सौंप दिया गया है. बीजेपी के फायरब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ को सीएम चुन लिया गया है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में योगी आदित्यनाथ 19 मार्च को स्मृति उपवन में शपथ ग्रहण करेंगे. सुरेश खन्ना ने योगी आदित्यनाथ के नाम का प्रस्ताव विधायकों के सामने रखा जिसे सभी के समर्थन से सीएम चुन लिया गया.

गोरखनाथ मंदिर के महंत अवैद्यनाथ ने योगी आदित्यनाथ को दीक्षा दी और उन्हें योगी बनाया था. 1998 में अवैद्यनाथ ने राजनीति से संन्यास लिया और आदित्यनाथ को अपना उत्तराधिकारी  बनाया, जिसके बाद योगी आदित्यनाथ का राजनीतिक जीवन प्रारंभ हुआ.

12वीं लोकसभा के सबसे युवा सांसद:

आदित्यनाथ 26 वर्ष की आयु में पहली बार सांसद बने थे. हिन्दू युवा वाहिनी के संस्थापक योगी आदित्यनाथ गोरखपुर में भाजपा का एक अभेद्य किला बनकर उभरे. लगातार 5 बार सांसद चुने जा चुके योगी आदित्यनाथ अपने बेबाकी के लिए जाने जाते हैं. आक्रामक तेवर के कारण कई बार विपक्ष के निशाने पर रहे योगी के कारण बीजेपी को भी परेशानी झेलनी पड़ी चुकी है.

कई बार विवादित बयानों के कारण भी योगी आदित्यनाथ चर्चा में रहे हैं. गौ-रक्षा दल और धर्मान्तरण की खिलाफत कर इन्होने अपने समर्थकों के बीच अलग छवि बना ली. गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ अब उत्तर प्रदेश की बागडोर संभालेंगे. आज दिल्ली से उन्हें अचानक बुलावा आया था और कई घंटे की मीटिंग के बाद वो लखनऊ लौटे थे.

इसके पहले केशव प्रसाद मौर्य और मनोज सिन्हा का नाम भी सबसे ऊपर था और लगातार दिन भर ख़बरों का बाजार गर्म रहा कि आखिरकार कौन यूपी का अगला सीएम होगा. वहीँ सतीश महाना से लेकर सुरेश खन्ना तक का नाम भी रेस में था जबकि स्वतंत्रदेव को भी यूपी के सीएम पद के लिए दावेदार माना जा रहा था.

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वीडियो: यूपी से ‘पीके’ गायब, कांग्रेस कार्यालय के बाहर लगा होर्डिंग बना चर्चा का विषय!

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उत्तर प्रदेश में जहां भाजपा कार्यालय से लेकर स्मृति उपवन और दिल्ली तक नया मुख्यमंत्री बनाने की योजना चल रही है। वहीं कांग्रेस कार्यालय के बाहर कांग्रेस के रणनीतिकार प्रशांत किशोर के गायब होने का लगा होर्डिंग चर्चा का विषय बना हुआ है। इस होर्डिंग में पीके को खोजकर लाने वाले को पांच लाख रुपये का इनाम देने की भी बात लिखी गई है। यह होर्डिंग राजेश सिंह प्रदेश सचिव उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी और समस्त कार्यकर्ताओं की तरफ से लगवाया गया है।

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मोदी के कदम रोकने के लिए निकाला था ब्रम्हास्त्र

  • बता दें कि उत्तर प्रदेश में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बढ़ते कदम को थामने के लिए कांग्रेस ने चुनावी युद्ध के लिए अपना ब्रम्हास्त्र समय से पहले ही बाहर निकाला।
  • भाजपा को विधान सभा चुनाव 2017 में हराने के लिए राहुल गांधी और सोनिया गांधी ने अपने चाणक्य प्रशांत किशोर के प्लान (313+90) सीट पर सहमत हुए लेकिन उनकी लुटिया डूब गई।
  • पीके चाहते थे कि प्रियंका गांधी यूपी के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल के साथ संयुक्त रूप से प्रचार करें।
  • इसी तरह राहुल और सीएम अखिलेश भी दोनों मिलकर रैली करें।
  • हालांकि उनकी इस योजना पर दोनों नेताओं ने काम किया और भाजपा ने सबका सूपड़ा साफ कर दिया।
  • गठबंधन की हवाएं भी तेज हुईं लेकिन मोदी की सुनामी के आगे बौनी साबित हो गईं।

राहुल को पीएम बनाने का सपना भी अधूरा

  • बता दें कि पिछले दिनों हुए सपा में घमासान के दौरान अखिलेश ने प्रशांत किशोर के साथ एक मीटिंग की थी।
  • इसके बाद अखिलेश ने राहुल के साथ गठबंधन के लिए हाथ बढ़ाया।
  • फिर भी कांग्रेस यूपी में अपनी खोई हुई अपनी जमीन हासिल नहीं कर पाई।
  • फ़िलहाल सपा-कांग्रेस के गठबंधन ने चुनाव तो नहीं जीता पाया इसलिए 2019 में राहुल को पीएम बनाने के लिए प्रियंका की जंग भी फीकी पड़ गई।

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किसी चुनौती से कम नहीं है इन 8 विधायकों के दुर्ग को भेद पाना!

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उत्तर प्रदेश की राजनीति में कई ऐसे चेहरे हैं इनके आगे किसी भी नेता की जीत बहुत ही चुनौती रहती है। करीब आधा दर्जन से अधिक नेता ऐसे हैं इनका दुर्ग भेद पाना किसी भी नेता के लिए मुश्किल काम है। यूपी के दुर्ग की कुछ अभेद्य सीटें हैं इन सीटों पर मोदी, अखिलेश या मायावती किसी भी दिग्गज की लहर नहीं चलती।

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यह हैं उन नेताओं के नाम

  • आजम खां- समाजवादी पार्टी के कद्दावर और वरिष्ठ नेता आजम खां रामपुर जिले में सदर विधानसभा सीट से विधायक हैं। अगर बात 1996 के उपचुनाव को छोड़ करें तो आजम खां ने 1980 से लेकर 2017 तक नौ बार इस सीट पर जीत दर्ज की है। प्रदेश में मोदी लहर होने के बाद भी आजम की इस सीट को कोई हिला नहीं सका।
  • प्रमोद तिवारी- यूपी के प्रतापगढ़ जिले की रामपुर खास विधानसभा सीट से साल 1980 से लेकर 2012 तक के नौ चुनावों में कांग्रेस के नेता प्रमोद तिवारी ने जीत हासिल की है। वह 2014 में राज्यसभा पहुंचे तो उन्होंने यह सीट अपनी बेटी आराधना मिश्रा को सौंप दी। 2014 में हुए उपचुनाव और 2017 के आम चुनाव में आराधना इस सीट पर जीत हासिल की।
  • राजा भैया- यूपी के प्रतापगढ़ जिले की कुंडा सीट पर रघुराज प्रताप सिंह उर्फ राजा भैया का परचम लहराता आया है। राजा भैया के किले को भेद पाना किसी भी नेता के लिए बहुत ही चुनौती पूर्ण है। उन्होंने पहली बार 1993 में कुंडा सीट से निर्दल प्रत्याशी के रूप में जीत हासिल की थी। तब से राजा भैया लगातार निर्दलीय पद पर ही चुनाव लड़ते आये हैं उन्होंने पांचवी बार फिर जीत हासिल की है। राजाभैया से पहले कुंडा विधानसभा सीट से कांग्रेस के नियाज हसन 1962 से 1989 तक 5 बार विधायक रहे हैं। राजाभैया कल्याण सिंह, राम प्रकाश, राजनाथ सिंह, मुलायम सिंह और अखिलेश सरकार में मंत्री रहे हैं। अब देखना यह होगा की भाजपा सरकार में उन्हें मंत्री बनाया जाता है कि नहीं।
  • सुरेश खन्ना- उत्तर प्रदेश की शाहजहांपुर नगर सीट सुरेश खन्ना आठवीं बार बीजेपी के विधायक बने हैं। उनके इस दुर्ग को भेद पाना बहुत ही मुश्किल काम है। सुरेश खन्ना ने छात्र राजनीति मुख्य धारा की राजनीति में कदम रखा और पहली बार इस सीट पर 1980 में लोकदल पार्टी से चुनाव लड़ा लेकिन उनको हार का सामना करना पड़ा था। 1989 में सुरेश खन्ना भजपा के टिकट पहली बार इस सीट पर चुनाव जीते। तब से वह लगातार इस सीट पर लगातार चुनाव जीतते आये हैं।
  • नरेश अग्रवाल- यूपी के हरदोई जिले की सदर विधानसभा सीट पर नरेश अग्रवाल का परचम लगातार फहराता आया है। नरेश के इस दुर्ग को भेद पाना किसी भी दल के लिए बहुत ही चुनौती पूर्ण है। नरेश अग्रवाल ने इस सीट पर 1980 में पहला चुनाव जीता। वह वर्ष 1985 चुनाव नहीं लड़े थे, लेकिन 1989 से 2007 तक लगातार छह बार वह यहां से विधायक रहे। 2008 में नरेश राज्यसभा चले गए तो उपचुनाव से लेकर 2017 के चुनाव तक उनके बेटे नितिन ने लगातार तीसरी बार इस सीट पर जीत दर्ज की है।
  • दुर्गा प्रसाद यादव- यूपी के आजमगढ़ जिले की सदर विधानसभा सीट से समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता दुर्गा प्रसाद यादव लगातार जीत दर्ज करते आये हैं। यहां उनके आगे किसी भी पार्टी की लहर नहीं चलती। दुर्गा प्रसाद 1985 में पहली बार सदर्न विधानसभा इस सीट पर चुनाव लड़े और उन्होंने जीत हासिल की। इसके बाद से दुर्गा 2012 तक सात बार इस सीट से विधायक चुने गए। इस बार पूरे प्रदेश में मोदी लहर चली लेकिन दुर्गा ने यह सीट जीत कर सपा की झोली में डाली। उनका यह किला भी किसी दुर्ग से कम नहीं है।
  • सतीश महाना- यूपी के कानपुर महराजपुर सीट के अन्तर्गत आने वाली काफी आबादी कैंट विधानसभा सीट में आती है। यहां कैंट सीट पर सतीश महाना ने 1991 में जीत दर्ज की थी तब से वह लगातार चार चुनाव जीतते आये हैं। यह सीट सतीश महाना के नाम से जानी जाती है। सतीश ने 2012 में परिसीमन के बाद और 2017 का चुनाव महराजपुर सीट से लड़ा और उन्होंने यहां भी जीत दर्ज की। लोगों का कहना है कि सतीश महाना के लिए यह सीट भी कैंट की तरह ही अभेद्य किला बन गई है।
  • अखिलेश सिंह- यूपी के रायबरेली जिले की सदर विधानसभा सीट माफिया अखिलेश सिंह के नाम से जानी जाती है। अखिलेश सिंह लगातार इस सीट पर अपनी जीत का झंडा गाड़ते रहे हैं। अखिलेश 1993 से लगातार इस सीट पर विजय हासिल कर रहे हैं। अखिलेश साल 1993,1996 और 2002 में चुनाव कांग्रेस के टिकट पर जीते। लेकिन, 2007 का चुनाव निर्दल और 2012 में पीस पार्टी के टिकट पर जीते। पूरे प्रदेश में जब 2017 में मोदी लहर थी इसके बावजूद अखिलेश इस सीट पर अपनी बेटी अदिति सिंह को कांग्रेस के टिकट पर चुनाव जितवा दिया। अब इस सीट को अखिलेश के नाम से जाना जाने लगा है। इन सीटों में ज्यादातर जिलों में सदर सीटें ही प्रत्याशियों की पसंद बनी हैं जिन्हें भेद पाना किसी के लिए भी बहुत ही मुश्किल है।

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