9  Dec  2016

जब सदन में सुषमा स्वराज ने 'धर्मनिरपेक्षता' की बदलती परिभाषा और 'भारतीयता'...

जब सदन में सुषमा स्वराज ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ की बदलती परिभाषा और ‘भारतीयता’ के मायने समझाए

अगर सुषमा स्वराज को भारत की सर्वश्रेष्ठ महिला वक्ता कहा जाए तो शायद यह बेईमानी नहीं होगी, अटल बिहारी वाजपेयी के त्यागपत्र को अन्याय बताते हुए उसपर द्वापर और त्रेता युग का उदाहरण देते हुए 1996 में सदन में सुषमा ने सभी को निरुत्तर कर दिया था। उन्होंने ने ‘धर्मनिरपेक्षता’ की बदलती परिभाषा और ‘भारतीयता’ के जो मायने संसद में समझाए आज वो सबसे बेहतरीन भाषणों में से एक बताया गया है।

 

तत्कालीन सरकार में विदेशमंत्री सुषमा स्वराज को भी जब जब मौका मिला विपक्ष पर बड़े ही मीठे शब्दों में करारा तंज कसा, राजनीति में महिला सशक्तिकरण की बात सुषमा स्वराज का उदाहरण दिए बिना अधूरी है।

अगले पेज पर: जब अन्ना आंदोलन पर गुस्साए ‘लालू यादव’ ने संसद में सबको हंसा हंसा कर किया लोटपोट

 

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