अरबाज ने झुग्‍गी झोपड़ी से किया आईआईटी तक का सफ़र

अरबाज ने झुग्‍गी झोपड़ी से किया आईआईटी तक का सफ़र

मंजिल उन्‍ही को मिलती है, जिनके सपनों में जान होती है। परो सेे कुछ नही होता, हौसले से उड़ान होती है। इंंसान अगर चाहे तो क्‍या नही कर सकता। अपने सपनों को सच बनाने केे लिए अगर सच्‍चे मन से मेहनत की जाये तो एक ना एक दिन वो सपना हकीकत में तब्‍दील हो ही जाता है। आज हम आपको एक ऐसे लड़के की दास्‍ता सुनाने वाले है कि जिसने अपने हौसलों के दम पर अपने सामने आने वाली सभी मुश्किलों को पार करके एक ऐसा मुकाम हासिल किया है जो उसकी आने वाली जिन्‍दगी को पूूरी तरह बदल देगा।मुबई के स्‍लम ऐरिया में रहने वाले अरबाज ने अपनी छोटी सी झोपड़ी़ मेंं रहते हुए आईआईटी जैसी बेहद मुश्किल परीक्षा को पास करके कामयाबी की एक नई मिसाल कायम की है। अरबाज के पिता एक बस कडक्‍टर है। अपने पिता के साथ मुबई के खार इलाके की एक छोटी से झोपड़ी में रहने वाले अरबाज को अपनी जिन्‍दगी में कुछ कर गुजरने की धुन सवार हो गई थी। अपने बेेटे को उसकी मंजिल तक पहुंचाने के लिए अरबाज केे पिता ने भी अपना पूरा सहयोग दिया। बेहद कम पगार होने के बावजूद उन्‍होने अपने बेटेे को किसी काम में नही लगाया बल्कि जितना पैसा वो कमाकर लाते, उसका कुछ हिस्‍सा अपने रोजमर्रा की जरूरत के लिए रखकर बेटे की पढ़ा़ई लिखाई में लगा देते।आपको बताते चले कि 12वीं की परीक्षा पास करने के बाद अरबाज पहली बार में आईआईटी की परीक्षा नहीं निकाल पाया था। अरबाज के लिए रास्ता कठिन था लेकिन पिता और बेटे दोनों ने हार नहीं मानी। आज अरबाज के साथ पढ़ने वाले उसके साथी और उसके टीचर्स उस पर पर नाज कर रहे हैं। सपनों को हासिल करने का अरबाज का ये जज्बा उन छात्रों के लिए मिसाल है जो संसाधन के अभाव को सफलता के रास्ते का रोड़ा मानते हैं।

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